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दिल्ली विश्विद्यालय में NSUI के कमाल की वजह है राहुल गाँधी का बर्कले में दिया स्पीच

नई दिल्ली: दिल्ली विस्विद्यालय में आज कांग्रेस की छात्र-विंग ने ज़बरदस्त कामयाबी हासिल की है. चार में से तीन सीटें और सभी एहम सीटें जीतने के बाद पार्टी में भारी उत्साह है. इस जीत की एहमियत का अंदाज़ा इसी बात से लग सकता है कि कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने भी जीते हुए उमीदवारों से मुलाक़ात की.

इस जीत के पीछे सबसे बड़ी वजह राहुल गाँधी को माना जा रहा है. कांग्रेस उपाध्यक्ष का कल यूनिवर्सिटी ऑफ़ बर्कले में दिया व्याख्यान पूरे देश में चर्चा का विषय रहा. राहुल के संबोधन की एहमियत इसी बात से लगाई जा सकती है कि कल पूरे दिन उन्हीं के बयान की चर्चा हुई. पूरी भाजपा उनके बयान की आलोचना करती रही और कांग्रेस पलटवार करती रही.

हालाँकि दिल्ली विश्विद्यालय में NSUI की स्थिति पहले से ही ठीक ठाक बतायी जा रही थी ऐसे में कल राहुल के भाषण ने NSUI को और मज़बूत किया. शाम को हुई वोटिंग से पहले छात्र राहुल का भाषण सुन चुके थे और उस पर हुई बहस भी. इससे ज़ाहिर है कि राहुल के भाषण का सकारात्मक असर हुआ जिसकी वजह से NSUI ने परचम लहराया.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह

दिल्ली विश्विद्यालय छात्र संघ चुनाव में ज़बरदस्त जीत के बाद NSUI और कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओं में ज़बरदस्त उत्साह है. दिल्ली की जीत का देश के अलग अलग हिस्सों में जश्न मनाया गया है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भी इस जीत का जश्न मनाया. सोनिया गाँधी से NSUI के जीते हुए उमीदवारों ने मुलाक़ात की.

कांग्रेस के इलावा समूचे विपक्ष में दिल्ली विश्विद्यालय के इन चुनावों में NSUI की जीत का जश्न देखने को मिला. वहीँ ABVP और भाजपा में आज के नतीजों के बाद शोक की अवस्था है.

लखनऊ विश्विद्यालय में भी NSUI से जुड़े सदस्यों ने जश्न मनाया. इस मौक़े पर नारेबाज़ी भी हुई और मिठाइयाँ भी बंटीं.

इस मौक़े पर युवा कांग्रेस नेता शैलेश शुक्ला ने कहा कि इस जीत के साथ साफ़ है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ही जीत का परचम लहराएगी. उन्होंने कहा कि इस जीत में राहुल भैया का विशेष योगदान है, उन्होंने पार्टी में युवाओं को जगह दी है.

मोदी राज में पहली बार हारी ABVP

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद सँभालने के बाद से दिल्ली यूनिवर्सिटी में ABVP लगातार चुनाव जीत रही थी लेकिन इस बार सब कुछ पलट गया .NSUI ने इस बार जीत दर्ज कर 6 साल से चली आ रही परंपरा को भी किनारे लगा दिया है. साथ ही चार साल बाद उसने अध्‍यक्ष पद पर जीत हासिल की है.

2011 से लेकर 2016 तक के आंकड़ों के अनुसार डूसू चुनाव केंद्र की सत्‍ता से सीधे-सीधे प्रभावित होती है. पिछले 6 साल के इन आंकड़ों में जब केंद्र में संप्रग सरकार थी तो एनएसयूआई के हाथ में डूसू की बागडोर थी.जैसे ही केंद्र में भाजपा आई तो डूसू में एबीवीपी का परचम लहराया.

इस बार एनएसयूआई के रॉकी तुसीद सहित अन्‍य उम्‍मीदवारों ने इन आंकड़ों पर ब्रेक लगा दिया है. वहीं इन पर पड़ने वाले कांग्रेस और भाजपा जैसी बड़ी पार्टियों के प्रभाव को भी नाकाफी साबित किया है.

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