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लोकसभा उपचुनाव नतीजों पर युवा नेताओं ने दी प्रतिक्रिया-‘जनता ने नफ़रत की राजनीति का जवाब दिया’

उत्तर प्रदेश में लोकसभा की दो सीटों के लिए हुए उपचुनाव में सपा ने बाज़ी मार ली है. इस जीत के कई मायने हैं, ऐसे में लखनऊ में युवा राजनीति करने वाले अलग-अलग दलों के नेताओं से हमने बात की. समाजवादी पार्टी के युवा नेता अनिल यादव ने अपनी पार्टी की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,”इस जीत ने अंधविश्वास रूपी उस क़िले को गिराने का काम किया है जो मठ और हिंदुत्व के नाम पर गुमराह कर कई दशकों से गोरखपुर संसदीय सीट पर काबिज था। दोनो सीटें मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की सीट रही हैं, दोनो लोग नफरत फैलाने के माहिर खिलाड़ी रहे हैं ,इनके ऊपर लगे दर्जनों मुक़दमे ये सिद्ध करते है,और जनता इस बात को समझ चुकी थी कि ये नाम के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री हैं।ये काम नही करते सिर्फ बोलते हैं।इनकी भाषा इतनी अच्छी है कि इंसान को सांप छछूंदर बोलते हैं।इस जीत ने झूठ फ़रेब और जुमलेबाज कि राजनीति करने वालो,छात्रों किसानों और महिलाओं के ऊपर अत्याचार करने वाली सरकार को एक बड़ा जवाब दिया।” सपा की युवा नेत्री पूजा शुक्ला कहती हैं,”ये नफ़रत की राजनीति को उत्तर प्रदेश की गंगा जमुनी तहजीब का जवाब है, बीजेपी आयी विकास के नाम पर लेकिन विकास के नाम पर जन विरोधी कार्य करती रही।अब उत्तर प्रदेश में सरकार भले ही उनकी हो लेकिन दिल से जनता माननीय अखिलेश यादव जी के विकास और साम्प्रदायिक सौहार्द की राजनीति के साथ है।”

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) से जुड़े प्रदीप शर्मा ने कहा कि जनता ख़ुद चाहती है कि बीजेपी के खिलाफ मोर्चा बने । आज की हार बताती है कि जनता भाजपा से नाराज़ है, सपा और बसपा का तालमेल सभी पिछड़ी और दलित जातियों को एक करेगा जिसमे अल्पसंख्यक और सभी सेक्युलर ताकते साथ होंगी । लोग मोदी की झूठ से ऊब चुके हैं।उन्होंने कहा,”उपचुनाव में evm setting न होना 2019 के लिए चारा हो सकता है”.आम आदमी पार्टी में युवा राजनीति करने वाले वंश राज दूबे ने कहा कि महाराष्ट्र के किसानों, दिल्ली के व्यापारियों,कई हफ्तों से अपनी माँगो को लेकर प्रदर्शन कर रहे SSC के छात्रों की आवाज उत्तर प्रदेश पहुच गयी। गोरखपुर और फूलपुर में भाजपा में का हुआ इनकाउंटर।”

लेफ़्ट राजनीति से जुड़े रहे सुधांशु बाजपाई इन दिनों “रोज़गार बचाओ अभियान” चला रहे हैं. उन्होंने सपा-बसपा की जीत पर कहा,”आज के चुनाव नतीजों में युवाओं की नाराजगी की बङी भूमिका है, रोजगार के सवाल पर नौजवानों से वायदाखिलाफी सरकार को महंगी पङी।सरकार नफरत-जाति-धर्म के जुमले छोड़कर युवाओं से किये वादे निभाए।” लखनऊ विश्विद्यालय में पढ़ाई कर रहे वैभव मिश्रा राजनीति में भी सक्रिय रहते हैं. वो विपक्ष की जीत पर कहते हैं,”नतीजों ने महंत बाबू को विशिष्ट रूप से हानि पहुंचाई है, उनके बढ़ते राजनैतिक प्रभाव पर ब्रेक का काम किया है, पर फ़िलहाल इन नतीजों के आधार पर 2019 में प्रदेश के लिए आंकलन करना पूर्णतया उचित नहीं होगा क्यूंकि अभी समर्थन के समीकरण की जीत है, “गठबंधन” की नहीं.

भाजपा की हार से पार्टी के समर्थक दुःख में तो हैं लेकिन उनका मानना है कि भाजपा अभी भी मज़बूत है. भाजपा समर्थक ब्रिजेन्द्र कुमार त्रिपाठी कहते हैं,”भाजपा अभी भी ताक़तवर है, सब साथ आये हारने के लिए और भाजपा का वोटर ने वोट नहीं दिया पर 2019 में योगी-मोदी की लहर रहेगी और भाजपा सरकार बनाएगी”

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