महिला दुनिया

सबसे लंबी भूख हड़ताल करने वाली महिला इरोम शर्मिला

मणिपुर की ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट इरोम चानू शर्मिला का जन्म 14 मार्च 1972 में हुआ था। इरोम का नाम आते ही दिमाग में उनके लिए एक लाइन आती है। नरम दिल लेकिन पक्के इरादे वाली महिला। इनके पिता का नाम इरोम नंदा और माता का नाम इरोम ऑन्गबी सखी है। इरोम ने पूर्वोत्तर राज्यों में अफस्पा को हटाने के लिए इरोम ने महात्मा गाँधी के नक़्शे कदम पर चलते हुए लगभग 16 सालों तक भूख हड़ताल की है।

उन्होंने यह भूख हड़ताल 4 नवंबर 2000 को शुरू की थी। दरअसल 1958 से पूर्वोत्तर राज्यों में लागू की गई थी जिसके तहत सुरक्षाबलों को किसी को भी देखते ही गोली मारने या बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार है। इस एक्ट के खिलाफ इस एक्ट के खिलाफ उन्होंने काफी लंबी लड़ाई लड़ी है। इरोम शर्मिला ने पिछले 16 सालों में ज्यादातर समय न्यायिक हिरासत में राजधानी इंफाल के एक अस्पताल में बिताया। इस दौरान उनपर आत्महत्या के आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया।

शर्मिला इसके खिलाफ इम्फाल के जस्ट पीस फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़कर भूख हड़ताल करती रहीं। जिसके लिए उन्हें एक बार नहीं बल्कि 16 सालों में कई बार गिरफ्तार किया गया। इस के लिए पोरोपट के सरकारी अस्पताल के एक कमरे को अस्थायी जेल बना दिया गया था।

इरोम शर्मिला को राजनीति में आने के भी अवसर मिले। जुलाई 2016 में आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण ने मणिपुर की लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी (आप) के टिकट पर 2016 के लोकसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। इस एक्ट के खिलाफ इस एक्ट के खिलाफ उन्होंने काफी लंबी लड़ाई लड़ी है। इरोम शर्मिला ने पिछले 16 सालों में ज्यादातर समय न्यायिक हिरासत में राजधानी इंफाल के एक अस्पताल में बिताया। इस दौरान उनपर आत्महत्या के आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया।

शर्मिला इसके खिलाफ इम्फाल के जस्ट पीस फाउंडेशन नामक गैर सरकारी संगठन से जुड़कर भूख हड़ताल करती रहीं। जिसके लिए उन्हें एक बार नहीं बल्कि 16 सालों में कई बार गिरफ्तार किया गया। इस के लिए पोरोपट के सरकारी अस्पताल के एक कमरे को अस्थायी जेल बना दिया गया था।

इरोम शर्मिला को राजनीति में आने के भी अवसर मिले। जुलाई 2016 में आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण ने मणिपुर की लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी (आप) के टिकट पर 2016 के लोकसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।
इरोम को अफ्स्पा के खिलाफ किये गए उनके विरोध के लिए आयरन लेडी का खिताब दिया गया।
28 साल की इस युवा कार्यकर्ता के इरादे इतने बुलंद थे की उन्होंने 44 साल की उम्र में अपना विरोध खत्म किया। उनके नाम पर अबतक दो रिकॉर्ड दर्ज हो चुके हैं। पहला सबसे लंबी भूख हड़ताल करने और दूसरा सबसे ज्‍यादा बार जेल से रिहा होने का रिकॉर्ड दर्ज है।

इरोम शर्मिला ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट होने के साथ एक कवियत्री भी हैं। इरोम शर्मिला ने 1000 शब्दों में एक लंबी ‘बर्थ’ शीर्षक से एक कविता लिखी थी। यह कविता ‘आइरन इरोम टू जर्नी- व्हेयर द एबनार्मल इज नार्मल’ नामक एक किताब में छपी थी। इस कविता में उन्‍होंने अपने लंबे संघर्ष के बारे में बताया है।
2014 में अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उन्‍हें एमएसएन ने वूमन आइकन ऑफ इंडिया का खिताब दिया था। इरोम के जान्ने वाले बताते हैं वह अक्सर युवा वोलंयटिर के रूप में अलग-अलग मानवाधिकार संगठनों की बैठकों में आती थीं और चुपचाप बैठी रहती थीं। जुलाई 2016 में उन्होंने अपना व्रत तोड़ने की घोषणा की। अगस्त 2016 को लगभग 16 साल के बाद उन्होंने अपना अनशन तोड़ा और राजनीति में आने की घोषणा की। इरोम पीपुल्स रिइंसर्जेंस एंड जस्टिस अलाएंस नाम की पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में उतरी थीं। लेकिन लेकिन 11 मार्च 2017 को नतीजे सामने आये तो इरोम शर्मिला चानू को मणिपुर की थोबल सीट से सिर्फ 90 वोट ही मिल पाए। चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों में वे आखिरी नंबर पर रहीं।

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