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कर्नाटक चुनाव: मायावती ने ये कोशिश न की होती तो शायद साथ न आते कांग्रेस-जेडीएस..

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए जा चुके हैं लेकिन अब तक राज्य की सत्ता को लेकर कशमकश बरकरार है। कर्नाटक में कांग्रेस बीजेपी और जेडीएस जेडीएस तीनों ही पार्टियां बहुमत हासिल करने में नाकाम रही है हालांकि भाजपा ने सबसे ज्यादा सीटें हासिल की हैं।

कांग्रेस ने राज्य में बीजेपी की सरकार बनने से रोकने के लिए जेडीएस से हाथ मिलाकर एक बड़ा दांव खेला है। क्योंकि अगर आप कर्नाटक की राजनीति के इतिहास पर नजर मारे तो सिद्धारमैया ने पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा का साथ छोड़ अलग हो गए थे। इसकी वजह यह थी कि देवेगौड़ा ने सत्ता सिद्धारमैया के हाथ में नहीं बल्कि अपने बेटे कुमारस्वामी के हाथों सौंप दी थी।
जिसके बाद सिद्धारमैया और कुमार स्वामी के बीच वैचारिक मतभेद रहे लेकिन आज इन दोनों नेताओं को एक होना पड़ा क्योंकि राज्य में बहुमत से सरकार बनाने में यह तीनों पार्टियों की असफल रही है। इन दोनों पार्टियों को के एक साथ आने में बसपा सुप्रीमो मायावती का बहुत बड़ा रोल रहा है।

बताया जा रहा है कि कर्नाटक चुनाव नतीजे सामने आने के बाद मायावती ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष अध्यक्ष सोनिया गांधी और जेडीएस प्रमुख एच डी देवेगौड़ा के बीच सुलह कराई है। मायावती ने कर्नाटक में BJP की सरकार बनने से रोकने के लिए देवेगौड़ा को कांग्रेस से समर्थन लेने की बात कही है।

आपको बता दें कि मायावती जेडीएस के साथ मिलकर कर्नाटक चुनाव लड़ चुकी हैं। बसपा ने कर्नाटक अपने उम्मीदवार उतारे थे इसके साथ मायावती ने नेताओं के साथ मिलकर कर्नाटक चुनाव प्रचार की कमान भी संभाली थी। मायावती ने जब देखा कि किसी भी पार्टी को उस तरह का बहुमत नहीं मिल रहा है कि वह खुद के दम पर सरकार बना सके, तब उन्होंने राज्यसभा सांसद और अपने मुख्य सहयोगी अशोक सिद्धार्थ को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद से मुलाकात करने को कहा था।

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