ता’लिबान पे सऊदी अरब ने चुप्पी तोड़ी,कहा-हम करेंगे तालिबा’न के लिए..

सऊदी अरब ने अफ़ग़ानि स्तान में तालि बान की अंतरिम सरकार पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है.सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फ़ैसल बिन फ़रहान ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि तालि बान और सभी पक्ष शांति और सु रक्षा के लिए काम करेंगे.”


प्रिंस फ़ैसल ने कहा, “सऊदी अरब उम्मीद करता है कि अफ़ग़ानिस्तान की कार्यवाहक सरकार सही दिशा में काम करेगी और लोगों को हिं’सा, अतिवाद के मुक्ति दिलाएगी.”

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब अब अफ़ग़ानिस्तान में शांति और स्थिरता की उम्मीद करता है. सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार प्रिंस फ़ैसल ने कहा कि उनका मुल्क अफ़ग़ान जनता की मदद करना जारी रखेगा.सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने कहा कि वे अफ़ग़ानिस्तान की संप्रभुता का सम्मान करते हैं.


सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने ये बात दोहराई कि इस मुश्किल वक़्त में वो अफ़ग़ानिस्तान की जनता के साथ खड़े हैं. प्रिंस फ़ैसल ने कहा कि सऊदी अरब अफ़ग़ानिस्तान को संकट से निकालने में हर संभव मदद करेगा. प्रिंस फ़ैसल ने यह बयान अफ़ग़ानिस्तान पर आयोजित एक वर्चुअल बैठक में कही है.


ता लिबान ने मंगलवार को अफ़ग़ानिस्तान में अंतरिम सर कार की घोषणा की थी. इस सरकार में मुल्ला मोहम्मद हसन अखुंद को प्रधानमंत्री और अब्दुल ग़नी बरादर को उप-प्रधानमंत्री बनाया गया है.

इससे पहले साल 1996 से लेकर 2001 तक अफ़ग़ानिस्तान में तालि बान का शासन था.उस वक़्त तीन देश सऊदी अरब, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात ने अफ़ग़ानिस्तान में ता लिबान सरकार की वैधता को स्वीकार किया था.

ता लिबान ने इस दौर में ओसा मा बिन ला देन के नेतृत्व में चल रहे चर मपंथी संगठन अल-क़ायदा को अपने यहाँ पनपने दिया था. इस संगठन को साल 2001 में अमेरिका में 9/11 के आतं कवादी ह-मलों के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है, जिसमें कुछ बहुमंज़िला इमारतें ध्वस्त हुईं और क़रीब 3,000 लोगों की जा न गई.

आज की तारीख़ में तालि बान ख़ुद को सही मायनों में “अफ़ग़ानिस्तान के इस्ला मी शासक” के रूप में देख रहा है और वो चाहेगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे इसी पहचान के साथ स्वीकृति मिले.

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