बिगड़े काम बनाती है रामायण की ये चौपाई…

October 30, 2018 by No Comments

हिंदुओं के दो प्रमुख ग्रन्थों में से एक रामायण, ज़िंदगी का एक अलग चित्रण करती है और बताती है कि कैसे अंत में बुराई पर अच्छाई की ही जीत होती है। रामायण एक राजपरिवार और राजवंश की कहानी है जो पति-पत्नी, भाई और परिवार के अन्य सदस्यों के आपसी रिश्तों के आदर्श पेश करती है। हर हिन्दू परिवार अपने बच्चों को एक ग्रंथ के बारे में बताता है और हर रविवार को सुबह टीवी पर रामायण देखते हुए ही बड़े हुए हैं।हिन्दू संस्कृति ना केवल रामायण को मानती है बल्कि रामायण की सीख को जीवन में भी उतारती है ।

रामायण हमें जीवन जीने का सार भी बताती है और साथ ही साथ हमें ऐसे भी महत्व के बारे में बताती हैं। जिनको जिंदगी में उतारने से हमारी जिंदगी सफल हो सकती हमारी जिंदगी पर सटीक बैठता है ।और हमें जीवन जीने की कला के साथ साथ मान मर्यादा और आदर्श भी सिखाती हैं ।रामायण में लिखा गया एक एक दोहा ,चौपाई और छंद मानो हमारी जिंदगी से ही लिखे गए हैं। आज हम रामायण के ऐसे ही एक दोहे के बारे में आपको बताना चाहते हैं ।आज हम आपको रामायण के एक ऐसे चौपाई के बारे में बताएंगे जिनको नहाने के बाद 5 बार केवल जपने मात्र से आपकी जिंदगी सफल हो सकती है।

आपको जीवन जीने की कला सिखा सकती है और साथ ही साथ अच्छे मार्गदर्शन भी करेगी। यह एक ऐसी चौपाई है जिसके सपने मात्र से ही आपको संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा आपकी बुद्धि विवेक और ईमानदारी हमेशा अच्छी बनी रहेगी। यह चौपाई है,” जो प्रभु दीनदयाला कहावा। आरति हरन बेद जस गाबा।।~जपहि नामु जन आरत भारी।मिटहि कुसंकट होंहि सुखारि।।~दीनदयाल बिरद संभारी।हरहु नाथ मम संकट भारी।।” ऊपर लिखी हुई चौपाई एक मात्र चौपाई ही नहीं है ,बल्कि यह कैसे चौपाई जिसको मात्र 5 बार बोलने से आपकी किस्मत समझ सकती है ।लक्ष्मी हमेशा आपके साथ निवास करेंगे और साथ ही साथ आपकी बुद्धि विवेक हमेशा बनी रहेगी ।शुभ घड़ी हमेशा आपके पास आती रहेंगी। आप कोई भी गलत काम नहीं करेंगे और निश्चित ही इमानदारी के साथ हाथ जिन कामों में मन लगाएंगे उसमें सफलता आपके कदम चूमेगी।

आपको बता दे कि,रामायण की सबसे बड़ी सीख है कि बुराई पर हमेशा अच्छाई की ही जीत होती है। यह ग्रंथ हमें अच्छी संगति के महत्व को बताता है। साथ ही साथ बताती हैं कि हमें अपने आराध्य के चरणों में बिना किसी संदेह के अपने आप को समर्पित कर देना चाहिए। जब हम अपने आपको उस सर्वव्यापक के चरणों में समर्पित कर देते हैं, तो हमें निर्वाण या मोक्ष की प्राप्ति होती है और जन्म-मरण से छुटकारा मिलता है। भगवान राम का विनम्र आचरण और अपने से बड़ों और छोटों सबको सम्मान देना हम सबको एक सीख देता है। हमें रुतबा, उम्र, लिंग आदि के भेदभावों के बावजूद सबसे समान व्यवहार करना चाहिए। हमें पशुओं से भी प्यार और दयालुता से पेश आना चाहिए। सच्चा मानव वही है जो सबसे समानता से पेश आता है।

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