मोदी ने अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ान को कर दिया इग्नोर, तो एंकर साक्षी ने पूछा अहम सवाल, ‘PM क्रांतिकारियों का भी धर्म देखते हैं’?

October 25, 2018 by No Comments

नई दिल्ली: दो दिन पहले यानी 22 अक्टूबर को पूरे देश ने जंगे आज़ादी के महानायक अशफाक उल्लाह खान की जयंती मनाई, लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को तो जन्मदिन की बधाई लेकिन उन्होंने देश के लिये शहीद हुए अशफाक उल्लाह खान को पूरी तरह से नज़र अंदाज़ कर दिया।

जानकारी के लिये बता दें कि 22 अक्टूबर को आज़ादी के महानायक अशफाक उल्लाह खान का जन्मदिन होता है। लेकिन यह संयोग मात्र ही है कि उसी रोज़ भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह का भी जन्मदिन है। शहीदों के नाम पर राजनीति करने वाली भाजपा ने बीते 22 अक्टूबर को आज़ादी के महानायक अशफाक उल्लाह खान को याद करना भी जरूर नहीं समझा।

सत्ता के नशे में चूर भाजपा के कार्यकर्ताओं से लेकर पार्टी के दिग्गज नेताओं तक ने अमित शाह को बधाई देते हुए उनकी लंबी उम्र की कामना की। लेकिन इस दिन बीजेपी दफ्तरों में देश पर जान न्योछावर कर देने वाले अशफाक उल्लाह खान का कोई ज़िक्र होता सुनाई नहीं दिया। हैरानी तो इस बात की है कि देश के हर एक नायक को याद करते हुए आंखों को नम कर लेने वाले हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस महान क्रांतिकारी का कहीं कोई ज़िक्र नहीं किया।

सोशल मीडिया पर हर रोज़ 10-15 ट्वीट करने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने अशफाक उल्लाह खान की जयंती पर कोई तक ट्वीट नहीं किया। उन्होंने पूरे दिन में एक बार भी इस महान क्रांतिकारी को याद नहीं किया। पीएम मोदी द्वारा देश की आज़ादी के नायक को भुलाए जाने पर लोगों ने सोशल मीडिया पर दुख का इज़हार किया है। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री स्वतंत्रता सेनानियों का भी धर्म देखकर उन्हें याद करते हैं।

न्यूज़ 24 की एंकर एंव पत्रकार साक्षी जोशी ने ट्वीट करते हुए कहा कि, “पूरा दिन इंतज़ार किया,हमारे प्रधानमंत्री ने अशफाक उल्लाह खान पर ट्वीट नहीं किया! हो सकता है ब्रिटिश राज से लड़ने के लिए असला बारूद चुराना इनकी नज़र में क्रांतिकारी न हो। ब्रिटिश राज से माफ़ी न मांग कर सजा कम न करवाना भी क्रांतिकारी न हो। फ्रीडम फाईटर का भी धर्म हो गया है अब से?”।

साक्षी जोशी ने भाजपा के महानायक विनायक दामोदर सावरकर की तरफ इशारा करते हुए लिखा, “ब्रिटिश राज से माफ़ी न मांग कर सजा कम न करवाना भी क्रांतिकारी न हो”। उन्होंने आख़िर में पूछा, “स्वतंत्रता सेनानी का भी धर्म हो गया है अब से”?

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