सुब्रमण्यम स्वामी के बयान से भाजपा में ख़लबली, अपनी ही सरकार..

October 25, 2018 by No Comments

सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा को हटाने का फैसला मोदी सरकार के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। इससे केन्द्र की बीजेपी सरकार ने विपक्ष को बैठे बिठाये ही एक मुद्दा दे दिया है ।चुनाव नज़दीक है ऐसे मे विपक्षी दल तो सरकार को घेरेंगे ही। लेकिन सरकार के सहयोगी भी सरकार के लिए परेशानी खड़ी करने से नहीं चूक रहे है। हम बात कर रहे हैं बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की ।जिन्होंने ट्वीट करके अपने ही सरकार पर निशाना साधा है।

स्वामी ने ट्वीट कर कहा, सीबीआई कज क़त्लेआम मे शामिल रहे खिलाड़ी अब ईडी के अधिकारी राजेश्वर सिंह का निलंबन करने जा रहे हैं ताकि पीसी के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दाखिल ना हो सकज। उन्होंने आगे लिखा है अगर ऐसा हुआ तो उनके पास भ्रष्टाचार से लड़ने की कोई वजह नहीं बचती है, उन्होंने ट्वीट मे माना है कि मोदी सरकार भ्रष्टाचार के आरोपी लोगों को बचा रही है। उन्होंने हताशा के साथ लिखा हि कि उन्होंने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जितने मुक़दमे दायर किए हैं वह सब वापस ले लेंगे।


उल्लेखनीय है कि केन्द्र की बीजेपी सरकार ने सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेज दिया ।इससे पहले मंगलवार को आलोक वर्मा ने अपने जूनियर राकेश अस्थाना से सारी ज़िम्मेदारियां छीन ली थीं।राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोप थे ।इस मामले में सीबीआई ने राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। हालांकि अस्थाना ने आलोक वर्मा पर भी रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। विपक्ष का मानना है मोदी सरकार ने राकेश अस्थाना को बचाने के लिए आलोक वर्मा को हटाया है। सुब्रमण्यम स्वामी के ट्वीट से ज़ाहिर होता है वह भी विपक्ष की तरह ही सोच रहे हैं।

विवाद बढ़ता देख सरकार का बचाव करने के वित्त मंत्री अरुण जेटली को सामने आना पड़ा।उन्होंने विपक्ष के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि सीवीसी (केंद्रीय सतर्कता आयोग) की सिफ़ारिश पर यह फ़ैसला लिया गया है । जबकि कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों का कहना है कि सीवीसी के पास सीबीआई निर्देशक का नियुक्त करने या हटाने का अधिकार ही नहीं है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारियों को कार्यभार से मुक्त किया गया।उनके अनुसार सरकार ने जो फ़ैसला लिया है वो पूरी तरह से संविधान के अनुरूप है। हालांकि कानून विशेषज्ञों का कहना है कि सीबीआई निर्देशक का कार्य काल दो साल का होता है।

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