टूरिस्ट क्या खाए क्या पिए इससे सरकारों को क्या मतलब: नीति CEO

नई दिल्ली: शराब पर पाबंदी के दायरे को जहाँ कुछ सरकारें कोशिश कर रही हैं वहीँ इस बीच एक बड़ा बयान आया है. नीति आयोज के सीईओ ने इस बारे में बयान देते हुए साफ़ कहा है कि भारत में राज्यों की सरकारें टूरिस्ट के खान-पान पर रोक टोक नहीं लगातीं.

नीति आयोग के चीफ़ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर अमिताभ कान्त ने खाने-पीने को लेकर हो रही राजनीति पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि सरकारें ये फ़ैसला नहीं कर सकतीं कि एक टूरिस्ट क्या खाए और क्या पिए. उन्होंने कहा कि ये संभव नहीं है.

अमिताभ ने कहा कि एक टूरिस्ट क्या खता है और क्या पीता है ये उसका व्यक्तिगत मामला है, इससे सरकारों का कोई लेना देना नहीं.

इसके अलावा उन्होंने कहा,”मैं काफी लम्बे समय से कुछ बातों पर विश्वास करता हूँ. टूरिज्म सभ्यता का करैक्टर है, आप कबाड़ और गंदगी के साथ नहीं कह सकते कि हमारे पास हेरिटेज साइट्स हैं. इसलिए भारत को साफ़-सफ़ाई पर फोकस करना चाहिए. ये सबसे पहली बात है. दूसरी ज़रूरी बात सहज अनुभव है.”

गौरतलब है कि पिछले दिनों कुछ नेताओं ने शराब पीने वालों और बीफ़ खाने वालों पर बयान दिए थे. इनमें कई नेता NDA दलों के भी हैं. वहीँ सामाजिक कार्यकर्ता लगातार ये कहते रहे हैं कि एक इंसान जो भी खाना-पीना चाहे वो उसका व्यक्तिगत मामला है.

बीफ़ को लेकर तो देश के कई इलाक़ों में हिंसा और लिंचिंग की बात भी सामने आयी है. इस दौर में शुरू हुए मोब लिंचिंग के मामलों में सबसे पहले दादरी के अखलाक़ की हत्या हुई थी. इसके बाद मध्य-प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली-हरियाणा जैसे राज्यों में मुसलमानों और दलितों को “गौ रक्षा” के नाम पर गुंडागर्दी कर रहे लोगों का सामना करना पड़ा है.

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