30 साल तक सेना में नौकरी करने वाले अजमल को साबित करनी पड़ रही है नागरिकता

नई दिल्ली: सरकारी कामकाज भी कुछ ऐसा हो गया है और ऐसी ख़राब तरह से होता है कि व्यक्ति को नागरिकता सिद्ध करना भी एक जी का जंजाल बना हुआ है. आम लोग के बारे में एक बार मान भी लिया जाए कि सरकारी चीज़ें हैं हर एक चीज़ देखनी होती है तो कुछ दिक्क़त हो भी जाती है लेकिन जब आपको ये मालूम चले कि जिस आदमी ने तीस साल भारतीय सेना में काम किया है उसे भी नागरिकता का सुबूत देना पड़ेगा.. तो चिंता होने लगती है.

30 सितम्बर, 2016 को असं के सैनिक मुहम्मद अजमल हक़ रिटायर हो गए थे लेकिन उसके बाद से ही उनके पास लगातार नोटिस के ज़रिये नागरिकता के सुबूत मांगे जा रहे हैं.असल में मामला ये है कि अजमल हक़ रिटायरमेंट के बाद गुवाहाटी में आराम की ज़िन्दगी बिता रहे थे तभी उनके पास विदेशी न्यायाधिकरण का नोटिस आया. इस नोटिस में बताया गया था कि उन्हें सदिग्ध मतदाता सूची में डाल दिया गया है. उनके डाक्यूमेंट्स को भी जमा करवा लिया गया. डीएनए में छपी ख़बर के मुताबिक़ अजमल को भारतीय नागरिकता सिद्ध करने के लिए कहा गया था. इस मामले की पहली सुनवाई 11 सितम्बर को थी लेकिन उन्हें नोटिस देर से मिला तो वो जा नहीं सके. अब अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को है जिसमें अजमल अपना पक्ष रखेंगे.

अजमल सेना में मैकेनिकल इंजिनियर के तौर पर शामिल हुए थे और रिटायर होते समय जूनियर कमीशंड ऑफिसर के पद पर थे.

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