पाँचवी फ़ेल होने के बावजूद देश के सबसे अमीर इंसानों में से एक… पढ़िए मेहनत और लगन की ये कहानी..

MDH(महाशियाँ दी हट्टी) देश की दूसरी सबसे बड़ी मसाले बेचने वाली कंपनी है. इसका व्यापार कई देशों में है लेकिन इस कंपनी के मालिक महाशय धरम पाल गुलाटी ने जब शुरुआत की थी तो उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा था. महाशय धरम पाल गुलाटी के पिता महाशय चुन्नी लाल गुलाटी की सियालकोट में एक छोटी सी मसालों की दुकान थी. चुन्नी लाल की 1919 में खुली ये दुकान बहुत जल्दी कामयाब होने लगी और चुन्नी लाल को “देगी मिर्च वाले” के नाम से जाना जाने लगा.

उनके बेटे धरम पाल गुलाटी अपने शुरू के दौर में कोई बहुत कामयाब ना थे. कई तरह के छोटे मोटे काम उन्होंने किये जिसमें बढईगिरी, साबुन बनाना ये सब शामिल था. देश के बंटवारे के बाद वो दिल्ली आ गए. जब वो दिल्ली आये तो उनके पास 1500 रूपये थे. इन पैसों से उन्होंने दिल्ली में तांगा चलाना शुरू किया. वो कैनाट पैलेस से करोलबाग़ तांगा चलाते थे. वो मगर इससे बहुत ख़ुश ना थे और उन्हें इससे गुज़ारा करना मुश्किल हो रहा था. आख़िरकार उन्होंने अपने पिता के काम को अपनाया और मसाले बेचने के लिए एक खोखा खोला. उसके बाद जब उन्हें कुछ आमदनी होने लगी तो अजमल ख़ान रोड, करोलबाग़ में मसालों की दुकान खोली.

धरम पाल धीरे-धीरे कामयाबी की सीढ़ियाँ चढ़ते गए और साल 1959 में कीर्ति नगर में फैक्ट्री के लिए प्लाट ख़रीदा. 94 साल के धरम पाल आज देश के सबसे ज़्यादा तनख्वाह पाने वाले FMCG कंपनी के सीईओ हैं. धरम पाल की मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि वो हैं तो पाँचवी फ़ेल लेकिन आज देश की शान हैं. उनकी कामयाबी की दास्तान एक इमानदार और मेहनतकश इंसान की दास्तान भी है.

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