‘रोहिंग्या रिफ्यूजी में 60% बच्चे, बूढ़े और औरतें हैं, उन्हें आतंकवादी नहीं कहा जा सकता’

म्यांमार के रखाइन प्रांत से बांग्लादेश में आये रोहिंग्या रिफ्यूजी के बारे में बांग्लादेश के एन्वोय सैयद मुअज्ज़म अली ने कहा कि रोहिंग्या लोगों को आतंकवादी नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहा कि 60% लोग ऐसे हैं रोहिंग्या लोगों में जो बच्चे हैं, औरतें हैं और बूढ़े हैं. उन्होंने कहा कि वे उन्हें आतंकवादी नहीं कह सकते.

अली ने बताया कि वो बहुत मुश्किल परिस्तिथियों में रह रहे हैं. उन्होंने बताया कि भारत की तुलना में रोहिंग्या रिफ्यूजी की संख्या बांग्लादेश में बहुत अधिक है. उन्होंने कहा कि इसलिए उन्होंने मानवता का पक्ष लिया.

भारत में भी रोहिंग्या रिफ्यूजी को लेकर चल रही है चर्चा

भारत में इस मामले को लेकर राजनीति भी ख़ासी हुई है जिसमें कुछ नेताओं ने रोहिंग्या लोगों को देश के लिए ही ख़तरा बता दिया. इस मामले में केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके मांग की थी कि इस मामले में अदालत कोई दख़ल ना दे और सुरक्षा की दृष्टि से अगर सरकार रोहिंग्या लोगों को वापिस म्यांमार भेजना चाहे तो ये फ़ैसला केंद्र सरकार पर छोड़ा जाए.हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के रवैये को ठीक नहीं माना है. कोर्ट ने 21 नवम्बर तक रोहिंग्या रिफ्यूजी को देश से निकालने पर रोक लगा दी है.

सर्वोच्च अदालत ने साफ़ कहा है कि के केंद्र सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय वैल्यू में एक बैलेंस स्थापित करना चाहिए. अदालत ने कहा,”संविधान मानवीय मूल्यों पर बना है. देश की भूमिका बहु-आयामी होती है. राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक इंटरेस्ट की रक्षा होनी चाहिए लेकिन मासूम औरतों और बच्चों की अनदेखी नहीं की जा सकती.”

गौरतलब है कि म्यांमार के रखाइन प्रांत में हो रहे नरसंहार से बचने के लिए भारत में भी रिफ्यूजी आये हैं. हालाँकि ये संख्या सबसे अधिक बांग्लादेश में है जहां 5 लाख से अधिक रिफ्यूजी हैं. रोहिंग्या लोगों में बड़ी आबादी मुसलमानों की है जबकि कुछ हिन्दू और दूसरे धर्म के लोग भी हैं.

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