दुनिया की सबसे पुरानी मुस्लिम महिला जिन्हें याद है विश्व युद्ध की बातें…

October 15, 2018 by No Comments

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत आंतरिक निर्वासन में एक महिला जो दुनिया के सबसे पुरानी महिला होने का दावा करती है, उसने उनके निर्वासन की क्रूरता के बारे में याद किया और उसके बारे में बताया। उस मुस्लिम महिला का नाम कोकू इस्तांबुलोवा है जो अपने रूसी पासपोर्ट और पेंशन पेपर के अनुसार 129 वर्ष की है जिनका 1 जून 1889 को जन्म हुआ था। अब स्पष्ट और गहरे रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवित निर्वासन के वक्त चौंकाने वाली गवाही का खुलासा किया है। उसने भावनात्मक रूप से उस अजीब दिन से बात की है उसके मूल चेचन लोगों को लगभग 75 साल पहले कजाकिस्तान के चरणों में स्टालिन द्वारा बड़े पैमाने पर निर्वासित किया गया था और कहा कि वह अपने सभी वर्षों में एकमात्र खुश दिन था जब उसने अपनी मूल भूमि में अपने हाथों से बनाया गए घर में वापस प्रवेश किया फिर उस घर में हँसी ख़ुशी जिंदगी व्यतीत कर रही है।

उस महिला ने खुलासा किया कि उसे विदेशी भूमि में 13 साल की सजा सुनाई गई थी और वो सजा पूरा करके तभी उसे रिहा किया गया। कोकू ने घर छोड़ने के बारे में बताया कि रूसी लोगों ने कई खाली चेचन घरों पर कब्जा कर लिया था सबको घर से बेघर कर दिया था। हालांकि, कोकू अब मिट्टी, पानी और सूखी लकड़ी से अपने घर को तैयार करने के दिन थे। कोकू ने कहा है कि वह दिन वापस आ गया है और उसके घर की इमारत “दुनिया में सबसे खूबसूरत” घर है और वह खुशी भरा दिन भी था जब उसे अपना बनाया हुआ घर वापस मिला। जब उनसे पूछा गया कि उनके जीवन में एक ही खुशी का दिन था ? उसने बताया कि “वह दिन था जब मैंने पहली बार अपने घर में प्रवेश किया था, उन्होंने कहा ‘मैंने उस घर को खुद बनाया था, दुनिया का सबसे अच्छा घर मेरा है मैं वहां 60 साल तक रही थी जब मुझे मेरे ही घर से निकाल दिया गया था तब मुझे बहुत तकलीफ हुई थी।

उनकी महान पोती 15 वर्ष की मदीना, जिसे परिवार ने कोकू की देखभाल करने के लिए घर पर रखा है। उसने कहा “दादी ने निर्वासन से लौटने के बाद घर खुद बनाई थी, उसने मिट्टी और पानी मिलाया, सूखे लकडियां और घास को जोड़ा और इससे ऊपर पत्थरों को रखा, फिर उन्हें एक दूसरे पर रख दिया और बाद में सफेद रंग के साथ पेंट भी किया तब जाकर घर तैयार हुआ। कोकू ने बताया कि निर्वासन के वक्त इस्तेमाल की जाने वाली मवेशी-ट्रक और ट्रेनों में लोगों की मृत्यु कैसे हुई थी ? और उनके मृत शरीर गाड़ियां से बाहर फेंक दिए गए थी भूखे कुत्तों को खाने के लिए। अगर उसकी उम्र सही है, तो उस समय कुको की उम्र 54 वर्ष का था, स्टालिन की कार्रवाई की क्रूरता को दबाकर, उसने दृढ़ता से अपने मूल चेचन भाषा में कहा “गाड़ियां में गंदगी और मृत शरीर भी थे, हमें कहीं भी जाने की इजाजत नहीं थी। युवा काकेशस लड़कियों की मृत्यु हो गई थी क्योंकि वहां भीड़ इतनी थी की लोग गाड़ियों के शौचालय रूम में जाने के लिए शर्मिंदा थी, क्योंकि वहां भी लोग जमे हुए थे। वृद्ध महिलाओं ने उसकी शर्मिंदगी रोकने के लिए उसके आसपास खड़े हो गए थे ताकि वो पेशाब कर सके और कुछ हद तक उसे राहत देते थे, फिर भी हालत बदतर था।

उसके पश्चात कोकू ने पूछा कि अल्लाह ने मुझे इतना लंबा जीवन और इतनी छोटी खुशी क्यों दी ? मैं बहुत पहले मर चुकी होती, अगर अल्लाह ने मुझे अपनी बाहों में न पकड़ रखा होता मैं जिन्दा नहीं रहती, अधिकारियों का कहना है कि इस शताब्दी के शुरुआती हिस्से में युद्धों के दौरान कूको के दस्तावेजों के मूल खो गए थे जिसकी वजह से कोकू को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसका मतलब है कि फिर कुको समेत इन सभी दावों को विश्वसनीय जन्म या बचपन के लिखित अभिलेखों की कमी के कारण सत्यापित करना असंभव है। असाधारण उम्र साबित करने का कोई तरीका नहीं है। लेकिन चेचन्या में कोई भी उसकी दीर्घायु पर शक नहीं करता है और राज्य पेंशन फंड, एक राज्य निकाय का दावा है कि रूस में 110 वर्ष से अधिक उम्र के 37 लोग हैं जिनकी असाधारण आयु साबित करने का कोई तरीका नहीं है।

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