एक ग़रीब मुख्यमंत्री हार गया और पैसे वाली पार्टी जीत गयी…

March 5, 2018 by No Comments

जब किसी विधायक को भी देखो तो वो “जलवा” दिखाते हुए जाता है। विधायक के पास कौन सी गाड़ी है, कहाँ उसका घर है, घर में क्या क्या सुविधाएँ हैं, सब का चर्चा होता है और ऐसे नेता जो सामान्य जीवन बसर करते हैं उन्हें नेता ही नहीं माना जाता। अब जबकि दौर ऐसा हो चुका है तो ये कहाँ आसान था कि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार चुनाव एक बार फिर जीतते। सरकार देश के सबसे ग़रीब मुख्यमंत्री रहे हैं और उनका जीवन भी निहायत साधारण है।

साईकल से चलने वाले इस मुख्यमंत्री की हार सिर्फ़ सरकार अकेले की हार नहीं है बल्कि ये एक संदेश भी है कि अब जनता “जलवा” मांगती है। हालांकि ये भी एक दौर है, गुज़र जाएगा। एक समय के बाद जब जनता को ये एहसास होगा कि असली नेता जनता के बीच का होता है, जनता के ऊपर का नहीं..तब शायद जनता को पता चले कि भूल क्या हुई।सरकार की हार के और भी कारण हैं जैसे कांग्रेस का पूरा वोट भाजपा को चले जाना। इसके अलावा भाजपा के हर बड़े नेता का त्रिपुरा में प्रचार करना और भी बहुत कुछ लेकिन इस हार से एक संदेश जो सभी को गया है वो ठीक नहीं है।

संदेश ये है कि एक ग़रीब मुख्यमंत्री हार गया है, एक ऐसी पार्टी से जिसने चुनाव पर ख़ूब पैसा ख़र्च किया। सरकार की हार में सिर्फ़ सरकार की हार नहीं बल्कि एक विचार की भी हार है। सबसे अच्छी बात ये है कि जब हार होने के बाद सरकार से पूछा गया कि वो आगे क्या करेंगे तो उन्होंने साफ़ कहा कि वो देश भर में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) को मज़बूत करेंगे और साथ ही ग़रीबों के लिए काम करते रहेंगे। हम उम्मीद करेंगे कि देश की राजनीति का ये दौर बदलेगा और दुबारा ऐसे लोग चुनाव जीतने लगेंगे जो जनता के बीच के हैं.

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