अफ्तारी के वक़्त एक काम हरगिज़ मत करो जो दुआ मागोगे वो कबूल होगी

आज तक में गूंज उठती है मेरी दुआ है मेरी सदा, भूख प्यास में मजा आता है की डेट मेरे अल्लाह तू चाहता था कि मैं भूखा रहे और मैं भूखा बैठा हूं सिर्फ तेरे लिए। इसलिए अफ्तार के वक्त दुआ क्यों कुबूल है दुनिया भर के अच्छे-अच्छे पकवान हमारे सामने रखे होते हैं और हमारा काम अजान की आवाज सुनने में लगा होता है.
अल्लाह पूछता है कि खाना भी सामने है और पानी भी सामने है मेरे बंदे अजान की आवाज सुनने के लिए बैठे हैं यह बंदे क्यों नहीं खा रहे हैं क्यों नहीं पी रहे हैं तब फ़रिश्ते कहते हैं या अल्लाह यह सब तेरी मोहब्बत में बैठे हैं तब अल्लाह खुश होकर कहता है कि चल मेरे बंदे तू मांग तू जो मांगेगा मैं तुझे वो दूंगा।तारिक जमील साहब कहते हैं कि ठंडे शरबत मत पियो अफ्तारी के वक़्त बाद में चाहो तो पीलो.

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जिस तरह इंजन गर्म होता है तो उस पर पानी नहीं फेकना चाहिए उसी तरह पूरे दिन भूखे रहकर शाम को अचानक से ठंडा शर्बत या कोल्ड ड्रिंक नहीं पीना चाहिए। जैसे इतना सब्र किया है वैसे ही थोड़ा और सब्र कर के सादा पानी पी लो। कुछ वक्त बीत जाने के बाद जो मन चाहे पियो ठंडा पानी पी लो,या कोल्ड ड्रिंक यह आपकी मर्जी है। लेकिन अफ़तार के वक्त तुरंत बचो तली हुई चीजों से और ज्यादा ठंडी चीजों से, मसालेदार चीजों से या ज्यादा भारी चीज़ो से.
ताकि रोज़े का मकसद साफ हो गंदगी से बचाव ,बीमारियों से बचाव हो। अपने काम से छुट्टी ले लो लेकिन रोज़ेे से छुट्टी नहीं। मेरे नबी ने कहा है कि अपने मुलाज़िम पर काम का बोझ कम डालो ताकि उसको रोजा बोझ ना लगे। पहले लोग रोज़े के दिनों में जन्नत बनाया करते थे लेकिन अब लोग रोजे के दिनों में पैसा बनाते हैं टेलीविजन वाले अपना प्रोग्राम बनाकर पैसा कमाते हैं और पैसा बनाने के लिए लोग अपने गुलामों नौकरों से खूब मेहनत करवाते हैं.
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कुछ लोगों को रमजान का इंतजार इसलिए नहीं होता है कि वो रोजे रखे ,वह तो रमजान का इंतजार इसलिए करते हैं क्योंकि रमजान में पैसे अच्छे बनते हैं। ये लोग सोचते हैं कि रोजे रखे या ना रखे,तरावी पढे़े या ना पढे बस पैसे आने चाहिए यह लोग यह नहीं जानते कि रमजान में सब की बख़्शीश हो जाती है कोई कितना भी बड़ा गुनहगार क्यों ना हो ,रोज़ा अल्लाह को खुश करने के लिए रखा जाता है.

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