वापिस हुआ रेलवे का तुग़लकी फ़रमान; 12 नहीं 8 ही घंटे की होगी ड्यूटी

लखनऊ: रेलवे प्रशासन के बेतुके फ़ैसले के ख़िलाफ़ कर्मचारियों का विरोध कामयाब रहा है. रेलवे प्रशासन ने काम करने के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 कर दिए थे जिसका तुरंत ही विरोध शुरू हो गया था. ज़बरदस्त रोष के साथ जब विरोध का एलान किया गया तो रेलवे प्रशासन को भी झुकना ही पड़ा.

कर्मचारियों के लगातार विरोध को देखते हुए इस फ़रमान को 24 घंटे के भीतर ही वापिस ले लिया गया है. असल में गुरुवार को पूर्वोत्तर रेलवे मंडल वाणिज्य प्रबंधक देवेन्द्र यादव ने कर्मचारियों को 8 के बजाय 12 घंटे काम करने का फ़रमान सुनाया था. लखनऊ जंक्शन पर तैनात कर्मियों के लिए भी यही व्यवस्था लागु करने की बात हुई. बुकिंग और ऑपरेटिंग वालों के भी घंटे 12 ही कर दिए गए.हालाँकि पार्सल घर में तैनात कर्मियों की ड्यूटी के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया था.

8 से 12 घंटे किये जाने के विरोध में कर्मचारी एकजुट हुए और इस फ़रमान का विरोध शुरू हो गया.मज़दूर संघ ने इसको लेकर 10 अक्टूबर को बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी.

कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए रेलवे ने इस फ़रमान को वापिस ले लिए. इसके साथ ही मज़दूर यूनियन ने भी अपना प्रदर्शन टाल दिया.

रेलवे के इस फ़रमान के पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं. रेलवे में कर्मचारियों की कमी भी इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है. बहुत दिनों से रेलवे में कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई है.

अन्तराष्ट्रीय मज़दूर क़ानून के मुताबिक़ भी 8 घंटे की ही ड्यूटी हो सकती है. जहाँ केंद्र सरकार बुलेट ट्रेन की बात कर रही है वहीँ आम कर्मचारियों को बेसिक सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं.

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