अगर आप भी ‘देसी घी’ खाते हो तो हुज़ूर (स.अ.व.) का फरमान ज़रूर सुन लो

दोस्तों अस्लामालेकुम,आज हम आपको इस इस्लामिक पोस्ट में देसी घी के बारे में बताने वाले है.आज हम आपको यह बतायेंगे कि हुजुर (स.अ.व.) घी को पसंद किया करते थे या नही.आज हम हुज़ूरे पाक स.अ.व. का एक बेहतरीन वाकिया आपको बतायेंगे.दोस्तों प्यार नबी स.अ.व. के पास हज़रत उम्मे आई.उनके हाथ में एक डिब्बा था जिसमे घी मौजूद था .

उन्होंने घी को हुज़ूरे पाक को पेश किया.हुज़ूरे पाक स.अ.व. ने घी के डिब्बे को खोलकर उसमे दुआ पढ़ दी है और काफी हिस्सा उसमे से निकाल अपने डिब्बे में रख दिया और थोडा घी उस डिब्बे में छो.ड़ कर हज़रत उम्मे र.अ. को वापस भेज दिया है.

हज़रत उम्मे खुश होकर घर चली गयी जहाँ पर उन्होंने डिब्बे को साफ़ करने के लिए खोला तो डिब्बा घी से भरा हुआ था.डिब्बे में घी भरा देखकर वो उ’दा’स हो गयी.उन्हें लगा कि हुजुर ऐ पाक स.अ.व. शायद ना’रा’ज़ है.

परेशान हज़रत उम्मे र.अ. ने इसके बाद हुज़ूरे पाक स.अ.व. के पास गयी और कहा क्या आप नाराज़ है आपने मेरा घी कबूल नही फरमाया.यह सुनकर हुजुर ऐ पाक स.अ.व. ने कहाकि मैंने आपका घी कबूल भी फरमाया और खाया भी.

उन्होंने कहाकि मेरी दुआ अल्लाह ने कबूल फरमाया है मैंने दुआ किया था कि इस बर्तन में घी ऐसे ही बना रहे.दोस्तों इसके बाद डिब्बे में घी की कभी नही पड़ी.जब घी निकाला गया तब कुछ देर बाद फिर उसमे घी दुबारा आ जाता था.

कुछ समय बाद यह डिब्बे कही गा’य’ब हो गया लेकिन यह डिब्बा जब तक रहा तब तक इस डिब्बे में घी की कमी नही पड़ी.आप को यह इ’स्लामिक पोस्ट कैसी लगी ज़रूर कमेन्ट बॉक्स में जवाब लिखे.

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