अगर आपके ऊपर कर्ज बहुत जादा है तो नबी(स.अ.व्.) के इस अमल को करें, इंशा अल्लाह सब कर्ज ख़तम हो जायेगा

January 6, 2019 by No Comments

अस्सलाम अलेकुम मेरे प्यारे भाइयों और बहनों आज मैं आपको एक कर्जदार का वाक्य बताऊंगा।एक बार एक शख्स था जो कर्ज में डूबा हुआ था ।कर्ज चुकाने की उसकी हैसियत नहीं थी।कर्जदार उस पर टूट पड़े।उसके बाद उस आदमी ने कर्जदारो से कुछ मोहलत मांगी और वह एक दूसरे शख्स के पास गया उसने उस शख्स से 500 दिनार का कर्ज लिया.
कर्ज़ देने वाले ने उस शख्स से पूछा कि कर्ज वापस कब करोगे तो उसने कुछ वर्षों की मोहलत मांगी और कहा कि मैं इतने अरसे में तुम्हें कर्ज वापस कर दूंगा उसने अपने पहले खरीदारों के सभी कर्ज उतार दिए अब दिन-ब-दिन कुछ शख्स की हालत और खराब होने लगी धीरे-धीरे उसने जो कर्ज़ लिया था को चुकाने का वक्त आ गया।लेकिन उस वक्त की हालत इतनी खराब थी कि उसके पास कर चुकाने के लिए कुछ भी नहीं था.

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जिस शख्स से उसने कर्ज लिया था वह उसके पास आया और कहने लगा कि भाई कर्ज चुकाने का वक्त आ गया है तब उसने जवाब दिया कि भाई मेरे पास बहुदा कुछ भी नहीं है कि मैं तुम्हारा कर्ज चुका सकूं।कर्ज देने वाले ने यह बात सुनकर काज़ी को बुलाया काजी ने पूरी कहानी सुनी।कहानी सुनने के बाद काज़ी ने हुकुम दिया कि जब तक यह शख़्स कर्ज ना चुका सके इसको कैद में रखो.
कुछ अपने कार्य की बात सुनकर काजी से यह दरख्वास्त की कि मुझको एक दिन का वक्त दें मैं अपने घरवालों से मिलना चाहता हूं और उनको पूरी बात बताकर मैं यहाँ वापस जाऊंगा।तब काज़ी ने पूछा की इस बात की क्या ज़मानत है कि तुम वापस आ जाओगे?कभी की बात सुनकर वह आदमी कुछ देर चुप था लेकिन फिर बोला कि मैं सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की उम्मत से हूं मैं अगर वापस ना आऊं तो यह समझना कि मैं उम्मते मोहम्मद नहीं हूं.

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शादी इस बात की कीमत समझता था इसलिए उसने उस शख्स को जाने दिया ।वह आदमी वापस घर गया और अपनी बीवी को मिला उसमें अपनी बीवी को सारी बात बताई तब उसकी बीवी ने पूछा कि आपको यहां आने की इजाजत कैसे मिली तो उस आदमी ने जवाब दिया कि मैंने रसूल अल्लाह के नाम की जमानत ली है उसकी बीवी ने कहा अगर आपको रसूल अल्लाह के नाम की जमानत मिली है तो मैं उनके नाम पर गरूर भेजती हूं.
वह दोनों मियां बीवी बैठ गए और एक साथ नबी ए पाक पर दरूद भेजने लगे दोनों मियां बीवी दरूद पढ़ते पढ़ते सो गेम ख्वाब में उस आदमी ने रसूले पाक को देखा।आप रसूल अल्लाह ने फरमाया की जिसमें मुझे ख्वाब में देखा उसने मुझे सच में देखा रसूल अल्लाह ने उस आदमी से कहा कि सुबह हाकिम के पास जाना और उससे कहना कि मेरी तरफ से मेरा कर्ज अदा कर दो.उस आदमी को मेरा सलाम कहना और कहना कि रसूलल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने कहा है कि मेरी तरफ से मेरा कर्ज अदा कर दो। और अगर वह तुम्हारी बात ना माने तो तुम उससे कहना कि मेरे पास 2 निशानियां है.

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हर रात तुम मुझ पर सौ मर्तबा दरू भेजते हो किसी दिन तुम्हें इस बात का शक हो गया था की दरूद सौ मर्तबा नहीं हुई है उससे कहना कि वह 100 हो गई थी. सुबह हुई तो वह आदमी हाकिम के पास गया और उसने वही कहा जो रसूल अल्लाह ने उससे कहा।उस आदमी की बात सुनकर हाकिम रो पड़ा और अपने बैतूलमाल में से उसको 500 दिनार दे दी और साथ में 2500 दीनार और दी.
आदमी ने कहा यह पच्चीस सो दिनार कैसी तब हकीम ने जवाब दिया कि तुम्हारी वजह से मुझे रसूल अल्लाह की जियारत हुई इसलिए तुम यह 2500 मेरी तरफ से रखलो फिर वह आदमी काली के पास गया.अपनी बात बताइए को 500 दीनार भी और कहा कि तुम्हारी वजह से मुझे रसूल अल्लाह की जियारत हुई इसलिए मेरी तरफ से तुम यह 500 दिन रख लो और जाओ अपना कर्ज अदा करो.

जब वह आदमी अपने कर्ज़दार के पास पहुंचा तो उसने दरवाजा खोलते ही उस आदमी को गले लगा लिया और कहा कि तुम्हारी वजह से मुझे रसूल अल्लाह की जियारत हुई इसलिए मेरी तरफ से यह 500 तुम रख लो और उसको जाने दिया।देखिए दोस्तों दरूद की बरकत से कैसे हो 500 का कर्ज़दार आदमी 4000 दिनार का मालिक हो गया.

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