इस सीट को साठ हज़ार वोटों से जीती थी AIMIM ने, कहा जाता है ओवैसी का दुर्ग

October 27, 2018 by No Comments

नई दिल्ली : AIMIM के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और हैदराबाद चंद्रायणगुट्टा विधानसभा सीट से विधायक अकबरुद्दीन की यह सीट AIMIM का गढ माना जाता है जहां से असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी 1999 से लगातार विधायक हैं. छोटे ओवेसी के नाम से मशहूर अकबरुद्दीन हमेशा अपने बयानों से चर्चा में रहते हैं। भाजपा इस बार विधानसभा चुनाव में उनके खिलाफ मुस्लिम प्रत्याशी को उतार सकती है। बीजेपी की ओर से अकबरुद्दीन के खिलाफ सैयदा शहजादी का नाम सबसे ऊपर चल रहा है।

आपको बता दें कि अकबरुद्दीन ओवेसी पिछले 4 बार से विधायक हैं। उन्होंने पहला चुनाव 1999 में लड़ा था, इसके बाद 2004, 2009 और 2014 के चुनाव में इसी सीट से लगातार विधायक चुने गए। अकबरुद्दीन को हराना इतना आसान नहीं है। 2014 के चुनाव में उन्हें 80,393 वोट मिले थे। पिछले तीन विधानसभा चुनाव में मजलिस बचाओ तहरीक के डॉ. खयाम खान लगातार उनका सामना कर रहे हैं। लेकिन उन्हें हमेशा हार ही मिली है। 

वर्तमान में तेलंगाना पर के. चंद्रशेखर राव की नेतृत्व वाली TRS सत्ता में थी. सीएम चंद्रशेखर राव की अनुशंसा पर 6 सितंबर 2018 को विधानसभा को भंग कर दिया गया था. तेलंगाना में चुनावों को लेकर रूपरेखा तैयार हो चुकी है बात अगर हम पहले चरण की करें तो पहले चरण में 7 दिसंबर 2018 को विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे. जिसके ठीक 4 दिन बाद 11 दिसंबर को मतगणना होगी. नोटिफिकेशन 12 नवंबर को जारी होगा. नामांकन की आखिरी तारीख 19 नवंबर है. नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख 22 नवंबर है. 

अकबरुद्दीन ओवेसी के बड़े भाई
असदुद्दीन औवेसी की राजनीतिक शैली और आक्रामकता उन्हें दूसरे अल्पसंख्यक नेताओं से अलग खड़ा करती है। उनकी ताकत है मुद्दों पर पकड़, बातचीत का स्पष्ट व तर्कपूर्ण लहजा तथा उग्रता। यही वजह है कि उन्हें आजम खान और अबु आजमी की कतार में नहीं खड़ा किया जाता। बात चाहे संसद में बोलने की हो या किसी इंटरव्यू में पत्रकारों के तीखे सवालों का सामना करने की, औवेसी की बातचीत में जो आत्मविश्वास और आक्रामकता दिखती है वो अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिम युवाओं पर अलग प्रभाव छोड़ती है। वे सोशल मीडिया पर खासे एक्टिव हैं और इसके जरिए पब्लिक से कनेक्ट रहते हैं। न्यूक्लियर डील के समय दूसरे मुस्लिम नेताओं के विपरीत उन्होंने अमेरिका से डील का समर्थन किया था। पीएम मोदी के आह्वान पर हाल ही में उन्होंने एलपीजी गैस सब्सिडी छोड़ी और इसका फोटो ट्विटर पर शेयर किया।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *