पकोड़े तो पहले भी बिकते थे, लेकिन मोदी के ढ़ाई करोड़ रोज़गार देने के वादे का क्या हुआ: सुचेता डे

March 15, 2018 by No Comments

मोदी सरकार ने जिन दावों की दलीलें देकर साल 2014 में जनता से वोट हासिल किए थे। आज वही जनता उन दावों को पूरा न करने के लिए मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रही है। एक तरफ जहाँ देश के किसान सड़कों पर उत्तर आये हैं, वहीँ देश के युवा उन्हें बेहतर शिक्षा और रोज़गार ने न देने के कारण सरकार का विरोध कर रहे है।
आइसा ने सुरक्षित और प्रतिष्ठित रोजगार के लिए ‘रोज़गार मांगे इंडिया; नाम के कैंपेन से आंदोलन शुरू किया गया है।  एसएससी एग्जाम घोटाले के खिलाफ आवाज़ उठा और सरकार से रोज़गार की मांग कर रहे युवाओं, शिक्षकों, आशा कार्यकर्ता, आईटी एकसाथ सड़कों पर आ गए हैं। सोशल मीडिया पर RozgarMangeIndia से लोग जुड़ रहे हैं।

रोज़गार मांगे इंडिया पर ‘भारत दुनिया’ की बातचीत आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुचेता डे से बातचीत हुई। इस मुद्दे पर उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि देश से नौकरियां खत्म हो रही हैं, युवाओं के लिए सम्मानजनक रोज़गार नहीं है। इस देश की सरकार जैसी नीतियों पर काम कर रही है, उससे स्थिति और भी भयानक हो सकती है।
उनका कहना है की आज देशभर में युवा और किसान सरकार के खिलाफ अपनी मांगों के लिए आंदोलनरत हैं, जिसके लिए सिर्फ सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार हैं। सुचेता डे आगे कहती हैं, ये सरकार देश के कॉर्पोरेट जगत के कुछ चुनिंदा लोगों के लिए काम कर रही है, उनकों कर्ज दिए जा रहे हैं, लेकिन चार सालों में न देश के गरीब वर्ग के लिए कुछ किया गया है, न किसानों के लिए, और युवाओं की शिक्षा के स्तर को गिराया जा रहा है, ताकि युवा पढ़कर सरकारी नौकरियां या प्राइवेट सेक्टर में भी नौकरी न कर पाएं।
भाजपा सरकार अमीरों के लिए काम कर और गरीबों को झांसे में रखकर की हम आपके लिए काम रहे हैं, इसके जरिये सत्ता में बने रहना चाहती हैं। मीडिया भी उनके हाथ में है, साल 2014 में इन्ही कारोबारियों ने बीजेपी के चुनाव प्रचार पर पैसा लगाया है, बीजेपी ने उनसे वादा किया की हम सत्ता में आकर उनके लिए ही काम करेंगे।

सुचेता ने देश के प्रधानमंत्री मोदी के पकोड़े बेचकर रोज़गार करने के बयान का विरोध करते हुए कहा कि देश में स्व-रोज़गार उनके आने से पहले से चलते आ रहे हैं, लेकिन उन्होंने सरकार बनाने के बाद युवाओं को ढ़ाई करोड़ रोज़गार देने का दावा किया था, उसका क्या ? पकोड़े बेचना कोई रोज़गार नहीं है। आज मोदी सरकार कह रही है की हम नौकरियां नहीं दे पाएंगे। लोग अपना रोज़गार करें।
क्या देश में पढ़े-लिखे युवाओं का अच्छी और सम्मानजनक, सुरक्षित नौकरी पाना उनका अधिकार नहीं है। लोग छोटे-मोटे रोज़गार कर रहे हैं, लेकिन वह मजबूरी में या पढ़े-लिखे न होने के कारण करते हैं। मोदी सरकार का स्टार्टअप इंडिया, स्किल्ड इंडिया जैसे प्रोग्राम तो फ़ैल हो चुके हैं।

सरकारी नौकरियां पहले से बहुत कम कर दी हैं और उसमें भी सरकार ने नीतियों में बदलाव कर दिया है। उनके लिए उम्र में कटौती कर दी गई है। सरकारी परीक्षाएं होती ही नहीं हैं, यूपीएसी एग्जाम की सीटें कम हो गई है। सरकारी परीक्षाओं में घोटाले हो रहे हैं। दिल्ली में बीते दिनों से देशभर से युवा इक्क्ठे हुए हैं, जो SSC Examघोटाले के लिए सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

मोदी सरकार देश के लोगों को ऐसे मुद्दे से भटकाने के लिए हिन्दू-मुस्लिम, देशभक्त- देशद्रोही जैसे मुद्दे उठा रही है, ऐसे मुद्दों को उठा कर गरीबी और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों को दबाया जा रहा है। मीडिया भी बीजेपी के हाथों बिकी हुई है, कुछेक चैनलों के अलावा कोई भी बेरोज़गारी, शिक्षा के स्तर में गिरावट, आम जनता की समस्याओं पर बात नहीं करता है। कोई किसानों, मजदूर, महिलाओं, बेरोज़गार युवाओं पर बात की जाती है? हिन्दू- मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद पर बात कर पेट भरा जा सकता है ? देश के खिलाफ मीडिया भयानक तरह से काम कर रहा है।

उसके बावजूद लोग बड़ी संख्या में सड़क पर उतर रहे हैं। बीते दिनों से एसएससी एग्जाम को लेकर आंदोलन चल रहा है। उसे बीजेपी समर्थक मीडिया क्यों नहीं दिखा रहा है ? ऐसे आंदोलनों के बारे में देश के लोग मीडिया के जरिये ही जानेंगे, लेकिन जब मीडिया ही इसे नहीं दिखायेगा तो लोगों तक इसकी जानकारी कैसे पहुंचेगी। दरअसल ये मीडिया तंत्र की साज़िश है।

देश में वामपंथी दलों से जुड़े युवा नेता अलग-अलग राज्यों में ऐसे मुद्दों पर आंदोलन कर रहे हैं। सीपीआई-एम एल का छात्र संगठन आइसा बड़े स्तर पर ‘रोज़गार मांगे इंडिया’ आंदोलन चला रहा है। मैं इससे जुड़ी हुई हूँ। महाराष्ट्र में किसान आंदोलन को जेएनयू के पूर्व छात्र और ऑल इंडिया किसान सभा के जॉइंट सेक्रेटरी विजू कृष्णन ने बड़ी अच्छी तरह से चलाया है। जेएनयू में छात्र संघ की अध्यक्ष गीता कुमारी, दिल्ली यूनिवर्सिटी में कंवलप्रीत कौर ऐसे ही मुद्दों पर आंदोलन कर रहे हैं। बिहार में शिक्षा और रोज़गार के लिए मनोज मंज़िल आंदोलनरत हैं। ये सब लेफ्ट से जुड़े हुए युवा चेहरे हैं।

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