ऐसी औरत घर को बना देती है जन्नत , नबी (स.अ.व.) का औरतो को लेकर ये फरमान ज़रूर सुने

नेक औरतें वो हैं जो फ़र्मांबरदार और शौहर की गैर मौजूदगी में अल्लाह की हिफ़ाज़त में माल व इज्ज़त की हिफ़ाज़त करने वाली हैं नबी करीम सल्ल्लाहू अलैहि वसल्लम से पूछा गया कि सबसे बेहतरीन औरत कौन सी है? आप ने फ़रमाया वो औरत जब शौहर उसे देखे तो ख़ुश कर दे और जब शौहर हुक्म दे तो इस की इताअत करे और अपनी जान व माल में शौहर का नापसंदीदा काम ना करे और इस की मुख़ालिफ़त ना करे।

हुसैन बिन मुहसिन से रिवायत है कि मुझे मेरी फूफी ने बताया कि मैं किसी काम से नबी करीम सल्ल्लाहू अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुई तो आपने पूछा कि ये कौन औरत है? क्या शौहर वाली है? मैंने कहा हाँ फिर आपने पूछा शौहर के साथ तुम्हारा रवैय्या कैसा है?

मैंने कहा मैंने कभी उस की इताअत और ख़िदमत में कसर नहीं छोड़ी सिवाए उस चीज़ के जो मेरे बस में ना हो। फिर आपने पूछा कि अच्छा ये बताओ तुम उस की नज़र में कैसी हो? याद रखू वो तुम्हारी जन्नत और जहन्नुम है।

औरत की मुहब्बत और इस की इताअत का सबसे ज़्यादा हक़दार शौहर है। इस का अंदाज़ा इस बात से बख़ूबी लगाया जा सकता है कि नमाज़ इबादत की निहायत आला क़सम है और सजदा उस की चोटी है लेकिन शरीयत ने शौहर का मुक़ाम विमर्तबा वाज़िह करने के लिए इतनी ऊंची मिसाल बयान किया है।

नबी करीम सल्ल्लाहू अलैहि वसल्लम मुस्लमान औरत के लिए पर्दा इस्लाम की ख़सुसीआत और इस के मुहासिन में से है। पर्दा में मुस्लमान औरत की इज़्ज़त वनामोस की हिफ़ाज़त है। पर्दा एक रहमत है.

इस्लाम ने औरत को इंतिहाई बेशक़ीमत मता क़रार दिया है इसलिए उस की हिफ़ाज़त वस्यानत का ख़ुसूसी एहतिमाम किया है ज़माना-ए-जाहिलीयत में पर्दा का कोई रिवाज नहीं था पर्दा सिर्फ और सिर्फ इस्लामी हुक्म है.

शौहर की इजाज़त के बग़ैर नफ़ली रोज़ा ना रखे नबी करीम सल्ल्लाहू अलैहि वसल्लम फ़रमाते हैं .कोई औरत अपने शौहर की मौजूदगी में इस की इजाज़त के बग़ैर नफ़ली रोज़ा ना रखे। (बुख़ारी

औरत की आवाज़ भी पर्दा है वो अजनबी मर्द के साथ इन शराइत के साथ बात कर सकती है (नंबर1 ) आवाज़ में लचक शीरीनी और मिठास ना हो (नंबर2 ) सिर्फ बक़दर ज़रूरत बात करे (नंबर3) पर्दे की ओट से बात करे। इरशाद रब्बानी है

और जब तुम इन (अजवाज-ए-मतहरात से कोई चीज़ माँगो तो पर्दे के पीछे से माँगो ये तुम्हारे और उनके दलों के लिए कामिल पाकीज़गी है.शौहर से इस की ताक़त और अपनी ज़रूरत से ज़्यादा का मुतालिबा ना करे.उसे इस बात पर यक़ीन होना चाहिए कि असल दिल की अमीरी है

और सब्र बाइस सआदत है। अगर औरत का मक़सद जे़ब व ज़ीनत ही हो जाये तो उस वक़्त हलाकत यक़ीनी हो जाती है। एक-बार नबी करीम सल्ल्लाहू अलैहि वसल्लम ने तवील ख़ुतबा दिया जिसमें आपने फ़रमाया बीवी शौहर की शुक्रगुज़ार हो नबी करीम सल्ल्लाहू अलैहि वसल्लम फ़रमाते हैं.

अल्लाह ताला ऐसी औरत की तरफ़ नहीं देखेगा जो अपने शौहर का शुक्र अदा नहीं करती। बीवी शौहर के वालदैन और बहनों के साथ हुस्न-ए-सुलूक से पेश आएशौहर के वालदैन और बहनों की इज़्ज़त वतकरेम ख़ुद शौहर की तकरीम वाज़त है.बच्चों की रज़ाअत और परवरिश करे.

माएं अपनी औलाद को मुकम्मल दो साल दूध पिलाऐं जिनका इरादा दूध पिलाने की मुद्दत पूरी करने का हो। (अलबक़रा )

सही इबन ख़ुज़ैमा में है कि जब नबी करीम सल्ल्लाहू अलैहि वसल्लम को जहन्नुम दिखाई गई तो आपने कुछ ऐसी औरतों को देखा जिनकी छातीयों को साँप नोच रहे थे और डस रहे थे। आपऐ ने पूछा ये क्या मुआमला है? बताया गया कि ये वो औरतें हैं जो बच्चों को दूध नहीं पिलाती थीं।

औरत ख़ुशबू लगा कर घर से ना निकले.सही मुस्लिम की एक रिवायत में है जो औरत ख़ुशबू इस्तिमाल करे उसे मस्जिद में नहीं आना चाहिए.जो औरत पाँच वक़्त की नमाज़ पढ़े एक माह का रोज़ा रखे अपनी शर्मगाह की हिफ़ाज़त करे और अपने शौहर की इताअत करे ऐसी औरत से कहा जाएगा जन्नत की जिस दरवाज़े से चाहो दाख़िल हो जाऐ.

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