ख्वाजा की मजार में खादिमो के बीच हुआ विवाद,जानिये पूरा मामला

October 10, 2018 by No Comments

आप सब जानते है की अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुदीन चिश्ती की दरगाह है, जहां पर हजारों की तादाद में लोग जाते है. यह ऐसी पहली दरगाह है जहां हिन्दू और मुसलमान दोनों जाते है. यहां पर आपको धर्म की मिसाल से उपर इंसानियत देखने को मिलेगी. यहां ख्वाजा की दरगाह पर चादरें और फुल चढ़ते है.

अभी हाल ही में ख्वाजा मोइनुदीन चिश्ती की दरगाह पर चढ़े फूलों से बनाने खुद्दाम ऐ ख्वाजा ने कदा एतराज जताया है. बीती रात खादिमों की एक बैठक हुयी जिसमे इसके सदस्य मुनव्वर चिश्ती, शमीम नियाजी, शेख्जादा चिश्ती, सैय्यद जावेद चिश्ती, हसन हाशमी, अब्दुल नईम खान आदि थे.


इन्होने कहा ख्वाजा साह्भ की मजार चढ़े फुल धार्मिक भावनाओं से जुड़े है. ऐसे में इन फूलों से खाद बनाना उचित नहीं है. इस बैठक में 100 से भी ज्यादा खादिम उपस्थित थे. बैठक में सभी की सहमती से यह निर्णय लिया गया की 8 अक्टूम्बर मजार शरीफ पर पेश फुल खाद बनाने के लिए नहीं दिए जायेंगे.


खादिम समुदाय अपने स्तर पर फूलों का उपयोग करेगा. इस पर खादिम जावेद चिश्ती ने कहा उनकी एक जमीन है जिस पर फूलों का निस्तारण किया जा सकता है. खादिमो के एतराज से एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया.

खादिमो को एतराज है खाद शब्द से

खादिमो की संस्था के सचिव वाहिद हुसैन ने कहा की पूरी विस्तृत जानकारी के बाद ही हमने वेदांत समूह को खाद बनाने का आर्डर दिया था. लेकिन लगता है की कुछ खादिमो को खाद शब्द से एतराज है. अब अगर कुछ खादिमों को दिक्कत है तो इसका समाधान निकाला जायेगा. उन्होंने यह भी कहा की पहले भी दरगाह कमेटी बावड़ी और कुओं में फूलों को डालती थी, तब भी खादिमो ने शिकायत की, इसलिए खाद बनाने पर सहमती बनी थी.

बात करके निकाला जायेगा हल

दरगाह कमेटी के नाजिम आईबी पीरजादा ने ताजा विवाद पर खाद बनाने का निर्णय खादिमों की दोनों संस्थाओं की सहमती से हुआ था. दरगाह कमेटी को तो खादिम समुदाय फुल देता है. यदि अब फुल नहीं दिए जायेंगे तो दरगाह कमेटी कुछ नहीं कर सकती. इस संबध में नारज खादिमों से बात करके इसका हल निकाला जायेगा.

अगरबत्ती और गुलाबजल पर बन सकती है बात

पहले भी अगरबत्ती और गुलाबजल का प्रस्ताव रखा गया था. इसी वजह से वापिस इस पर बात बन सकती है और शायद फूलों को अगरबत्ती और गुलाबजल बनाने में काम लिया जा सकता है.


आखिर क्यों हो रही है सियासत

जानकारी के अनुसार खादिम समुदाय में 2-3 माह में चुनाव होने वाले है, इसलिए इनमे सियासत गरमाई हुयी है. जो लोग नए चुनाव लड़ रहे है और जीतना चाहते है वे पहले के निर्णयों पर एतराज जता रहे है. आखिर समझ नहीं आ रहा है की समाज चाहता क्या है, लेकिन सियासत तेजी से चल रही है.

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