मुग़ल बादशाह अकबर ने तो प्रयाग की शान बढ़ाई थी और अल्लाहाबास…

October 17, 2018 by No Comments

इलाहाबाद: बचपन से लेकर बड़े हो गए हैं हम और इलाहाबाद को इलाहाबाद के नाम से ही जानते रहे हैं. किसी ने इस बारे में भी ख़ास नहीं सोचा होगा कि इसका नाम कब इलाहाबाद था और इसके पीछे कोई इतिहास है भी या नहीं. परन्तु उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार को इलाहबाद नाम से इस क़दर शिकायत हो गयी कि उसे बदल कर अब प्रयागराज कर दिया गया है. नाम बदलने के इस फ़ैसले का सभी जगह मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है वहीं सरकार इस फ़ैसले का बचाव करती नज़र आ रही है.

बात ये भी है कि इसका नाम प्रयागराज क्यूँ रखा गया क्यूँकि पुराणों से लेकर रामायण और महाभारत जैसे धार्मिक ग्रंथों में सिर्फ और सिर्फ प्रयाग का ही जिक्र है. 1574 में अकबर द्वारा किये गए नामकरण से पहले इलाहाबाद नाम की जगह का कहीं कोई जिक्र इतिहास में नहीं है.ऐसा माना जाता है कि प्रयाग पौराणिक नाम है और इलाहाबाद अकबर का दिया हुआ. इसके पीछे लेकिन कुछ और बातें भी हैं.. इनको एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता और न ही एक दूसरे के ख़िलाफ़.

पूर्वाग्रहों को छोड़कर अगर ईमानदारी से आंकलन करें तो प्रयागराज और इलाहाबाद दोनों ने एक-दूसरे की पहचान को न तो मिटाने की कोशिश की और न ही उनका महत्व कम किया. बात अगर तीसरे मुग़ल बादशाह अकबर की करें तो उन्होंने इलाहाबाद नाम का शहर एक अलग जगह बसाया था. दरअसल धर्मग्रंथों में दर्ज प्रयागराज सिर्फ एक तीर्थस्थल रहा है. गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी और ब्रह्मा जी द्वारा किये गए अश्वमेध यज्ञ की वजह से ही प्रयाग को तीर्थों का राजा कहा गया. कुंभ-अर्द्धकुंभ और माघ के मेले यहाँ प्राचीन काल से लगते थे. परन्तु प्रयाग वह क्षेत्र नहीं था, जिसे अकबर ने शहर के तौर पर बसाया.

अकबर ने प्रयाग में गंगा के दूसरे छोर पर वीरान पड़ी जगहों को विकसित कर नया शहर बसाया था, जिसे उसने इलाहाबाद नहीं बल्कि, अल्लाहाबास नाम दिया था. धर्म के जानकार आचार्य राम नरेश त्रिपाठी के मुताबिक़ प्रयाग का वर्णन तो स्कंदपुराण, मत्स्यपुराण, पदमपुराण, ब्रह्मपुराण, विष्णुपुराण और नरसिंहपुराण समेत दूसरे पुराणों में भी है. अल्लहाबास को अकबर के वक्त में ही बदलकर अल्लाहाबाद नाम कर दिया गया था. सैयद अज़ादार हुसैन कहते हैं कि अपने राज्य का विस्तार करते हुए अकबर जब 1574 के पास तीर्थराज प्रयाग आया तो उसने गंगा-यमुना के बीच की खाली जगह की उपयोगिता को समझा और यहां एक नया शहर बसाने का फैसला किया.

यमुना नदी के किनारे उसने अपना किला बनवाया जो तकरीबन बाइस साल में बनकर तैयार हुआ. इस दौरान अकबर कई बार इस जगह आया और 1574 में अपनी बसाई हुई जगह को अल्लाहाबास नाम दिया. अल्लाहाबास का मतलब वह जगह जो अल्लाह द्वारा बसाई गई हो. अल्लहाबास को अकबर के वक्त में ही बदलकर अल्लाहाबाद नाम कर दिया गया था, जो अब बिगड़ते हुए इलाहाबाद बोला जाने लगा है. किले के नजदीक ही दारागंज, कीडगंज और दरियाबाद जैसे मोहल्ले बसाए गए थे.

ये बात ज़रूर है कि अकबर द्वारा बसाए गए नगर के उद्देश्य को लेकर इतिहासकारों के मतभेद हैं.सैयद अज़ादार हुसैन का दावा है कि अकबर ने गंगा-यमुना नदियों के बीच होने की वजह से बेहद उपजाऊपन पानी की भरपूर उपलब्धता की वजह से नदी के दूसरी तरफ अलग जगह पर इलाहाबाद शहर को बसाने की कोशिश की थी. उनके मुताबिक़ अकबर ने गंगा-यमुना के बीच में रहने को आर्थिक तौर पर तो बेहतर माना ही था, साथ ही यह जगह सुरक्षा के लिहाज से भी ज़्यादा बेहतर थी.

सही मायनों में देखा जाए प्रयागराज एक तीर्थस्थल है, जबकि इलाहाबाद इस तीर्थस्थल से लगा हुआ एक शहर है. साहित्यकार और इतिहासकार दोनों मानते हैं कि प्रयागराज और इलाहाबाद ने एक- दूसरे की पहचान को बढ़ाया है. दोनों एक-दूसरे में रचे-बसे हैं, इसलिए दोनों में से किसी एक के वजूद को ख़त्म करना दूसरे के महत्व और उसकी पहचान को कम करना है.

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