ताजमहल विवाद पर बोले अखिलेश-“नफ़रत फैलानेवाले मोहब्बत के प्रतीक की क़ीमत क्या जानें”

लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज ट्विटर और फ़ेसबुक पर ताजमहल का एक फ़ोटो साझा किया है और उसके साथ में लीखा है,”नफ़रत फैलानेवाले मोहब्बत के प्रतीक की क़ीमत क्या जानें.”

अखिलेश की ये टिपण्णी भाजपा के उन नेताओं पर कटाक्ष मानी जा रही है जो ताजमहल को भारत की धरोहर मानने से इनकार कर रहे हैं. भाजपा विधायक संगीत सोम तो यहाँ तक कह गए कि ताजमहल भारतीय सभ्यता पर एक धब्बा है. गौर करने वाली बात ये है कि सोम का नाम मुज़फ्फ़रनगर दंगों में आ चुका है. भाजपा में कुछ और भी ऐसे नेता हैं जो ताजमहल को अच्छा नहीं मानते और इसकी प्रमुख वजह वो ये बताते हैं कि ये मुग़लों का बनवाया हुआ है.

अखिलेश के अलावा दूसरे नेता भी भाजपा नेताओं के इस रवैये से ख़ासे नाराज़ हैं. राजद नेता मनोज झा कहते हैं,”हाँ!अगर मुग़ल प्रभाव को बिलकुल ख़त्म करने वाले संगीत सोम जी (ने) जो पाजामा/कुरता/सदरी(बंडी) पहनरखा है उसे उतार फेंकिये.सब मुगलों ने ही लाया था.”

AIMIM अध्यक्ष असदउद्दीन ओवैसी ने कहा कि अगर ताजमहल गद्दारों ने बनवाया था तो लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाषण क्यूँ देते हैं? गौरतलब है कि ताजमहल और लाल क़िला दोनों ही शाहजहाँ ने बनवाया था.

ताजमहल को पूरी दुनिया में मुहब्बत का प्रतीक माना जाता है क्यूंकि मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने इसे अपनी पत्नी मुमताज महल (असली नाम- अरजुमंद बानो) की याद में बनवाया था. ताजमहल का निर्माण कार्य 21 वर्षों में पूरा हुआ था. इसके आर्किटेक्ट उस्ताद अहमद लाहौरी थे. हर वर्ष ताजमहल को देखने के लिए 70 से 80 लाख लोग आते हैं. इश्क़ ओ मुहब्बत की इस नायाब इमारत को सन 1983 में यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शुमार कर लिया गया. भले ही कुछ नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस पर उलटे सीधे नफ़रत पैदा करने वाले बयान दे रहे हों लेकिन आख़िर जीत मुहब्बत की ही होती है.

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