अखिलेश यादव ने ‘राफ़ेल’ को लेकर दिया बड़ा बयान-‘सच उजागर होना चाहिए’

दिल्ली: राफेल विमान सोदे जे जुड़ा विवाद सुलझने के बजाय उलझता ही जा रहा है । उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को अपने फैसले में केन्द्र सरकार को क्लीन चिट देते हुए कहा था कि कैग के साथ कीमत के ब्यौरे को साझा किया गया और कैग की रिपोर्ट पर पीएसी ने गौर किया। उच्चतम न्यायालय के फैसले के पैराग्राफ 25 में इसका जिक्र है। फैसले में कहा गया था कि फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदारी में किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई। सामने रखे गए साक्ष्य से पता चलता है कि केंद्र ने राफेल लड़ाकू विमान पर मूल्य के विवरणों का संसद में खुलासा नहीं किया लेकिन लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के सामने इसे उजागर किया गया ।

फैसले के बाद कांग्रेस नेता और पीएसी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनके सामने इस तरह की रिपोर्ट नहीं आयी थी।राहुल गांधी भी इस संदर्भ मे प्रेस कांफ्रेंस की थी। तब ही से इस मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया। सवाल उठाए जाने लगे क्या सरकार ने उच्चतम न्यायालय के सामने गलत विवरण दिया है। क्या उच्चतम न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश की गई है। इस मुद्दे पर जाने माने वकील प्रशांत भूषण ने एक ट्वीट किया है जिसमे उन्होंने लिखा है कि एसीएजी रिपोर्ट के बारे में राफले पर उच्चतम न्यायालय के फैसले मे पैरा 25 में वर्णित शुद्ध तथ्य कम से कम 3 मायने में गलत है।उन्होंने आगे लिखी कि यह ज्ञात नहीं है कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय को यह कब और कैसे बताया।

यह हमारे साथ साझा किए गए रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं था। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का बयान भी आया है। उनका कहना है कि नये तथ्यों के परिप्रेक्ष्य में राफेल के मामले में CAG-PAC रिपोर्ट पर पूरा सच उजागर होना चाहिए एंव उस पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फ़ैसला आने पर ही नये सिरे से राफेल की ख़रीद पर सरकार को फैसला लेना चाहिए। यह फैसला एक पारदर्शी व न्यायसंगत प्रक्रिया के तहत देश की रक्षा व अर्थव्यवस्था के हित में होना चाहिए।

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