ये नोटबंदी का एक बरस नहीं बरसी है: अखिलेश यादव

लखनऊ: 8 नवम्बर 2016 के दिन अचानक ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रूपये के नोट बंद करने का एलान कर दिया. रात 8 बजे के क़रीब किये गए एलान में कहा गया कि रात 12 बजे के बाद से ये नोट चलना बंद हो जायेंगे. अचानक हुए इस एलान ने कई लोगों के होश उड़ा दिए. कुछ तो यही नहीं समझ पाए कि जो पैसा उनके पास है उसके बदले उन्हें बैंक से नए नोट मिलेंगे भी या नहीं और इस वजह से कुछ हादसे भी हुए. मध्यम वर्ग ने शुरू में इस पर जश्न मनाया और बार बार ये कहा कि अब अमीर भी ग़रीब हो जाएगा लेकिन जल्द ही ये ख़ुशी जाती रही. अमीरों के पैसे बदले जाते रहे और ग़रीब लाइन में खड़े रह गए. पूरे-पूरे दिन लाइन में लगने के बाद लोगों के हाथ में 2000 रूपये नहीं आ पाते थे. कैश की क़िल्लत ने स्थिति ये कर दी कि रोज़-मर्रा की चीज़ें ख़रीदना मुश्किल हो गया. क़तारें इतनी लम्बी थीं कि कुछ लोग बेहोश हो गए तो कुछ की जान भी चली गयी.काला धन पकड़ने के नाम पर यूँ तो सरकार ने बार-बार नोटबंदी की तारीफ़ की है लेकिन काला धन तो शायद कुछ निकला ही नहीं.

अब नोटबंदी को एक साल हो गया है. साल भर होने के बाद केंद्र सरकार इसको एक त्यौहार की तरह मनाने जा रही है लेकिन दूसरी ओर विपक्ष इसे काला दिवस मनाने जा रहा है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भाजपा के इस रवैये की आलोचना करते हैं. अखिलेश ट्विटर के ज़रिये इसको दुखद बताते हैं. वो कहते हैं,”अर्थव्यवस्था की बदहाली, कारोबार-उद्योग की बर्बादी व देशव्यापी बेरोज़गारी में नोटबंदी का जश्न दुखद है. ये नोटबंदी का एक बरस नहीं बरसी है.”

अखिलेश के अलावा कई दूसरे नेता भी केंद्र सरकार और भाजपा की आलोचना करते हैं. इसको लेकर आज कई जगह प्रदर्शन भी किये जाने हैं. देर रात भी यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया.

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