अखिलेश के आगे नहीं टिक पा रहे हैं शिवपाल, यादव वोटरों पर नहीं चल पा रहा कोई जादू

November 6, 2018 by No Comments

समाजवादी पार्टी से अलग हुए शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी(लोहिया) बना ली है लेकिन अभी उनके लिए मुश्किलें आसान नहीं हैं। अभी भी वो सपा के ही टिकट पर विधायक हैं और उनके साथ जो नेता आ रहे हैं उन्होंने भी सपा की ओर जाने वाला एक रास्ता खोला हुआ है। शिवपाल की पार्टी के मज़बूत होने से सपा को झटका लगेगा लेकिन फ़िलहाल जो टूट कर नेता आए हैं इन्हें एकजुट करना शिवपाल के लिए आसान न होगा।

शिवपाल और उनके समर्थकों को लगता है कि जो वोटर सपा के लिए वोट करता आया है और इस समय सपा से नाराज़ है वो उनकी पार्टी को वोट दे सकता है। इससे भाजपा उत्साहित है। भाजपा को लग रहा है कि यादव वोट के बँटने का लाभ उन्हें मिलेगा लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है।

जानकार मानते हैं कि महागठबंधन होने की स्थिति में शिवपाल का वही हाल होगा जो हाल महाराष्ट्र में मनसे का हुआ या उससे भी बुरा हाल। शिवपाल के कुछ क़रीबी मानते हैं कि पार्टी बनाने के बाद कोशिश होनी चाहिए कि वो महागठबंधन का एक घटक बन जाएँ। परंतु अभी पार्टी नई है और ठीक से ज़िम्मेदारियाँ भी तय नहीं हो सकी हैं इसलिए शिवपाल कैम्प के लिए ये भी मुश्किल है।

शिवपाल को एक नुक़सान ये भी झेलना पड़ रहा है कि उन्हें भाजपा की बी टीम कहा जा रहा है। अखिलेश समर्थकों ने इस बात को फैलाने में कामयाबी हासिल की है और जो कुछ कसर थी वो योगी सरकार ने पूरी कर दी। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ ने शिवपाल यादव को बंगला अलॉट किया है। इसके बाद से ही ये चर्चा तेज़ हो गयी कि शिवपाल और भाजपा की मिलीभगत है। इस पूरे मामले को बाक़ी पार्टियाँ दूर से देख रही हैं। काँग्रेस और बसपा इस बात को भली-भाँति समझ रही हैं कि शिवपाल की जितनी चर्चा होगी उतना ही भाजपा को फ़ायदा होगा। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव शिवपाल की रणनीति से ज़रा भी विचलित नज़र नहीं आते और ये भी शिवपाल के लिए समस्या की बात है।

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