अल-अक्सा मस्जिद के पास एक हिस्सा भारतीय लोगों का भी..

October 13, 2018 by No Comments

येरुशलम : इस भारतीय धर्मशाला की स्थापना सूफी संत ख्वाजा फरीदुद्दीन गंजशाकर (बाबा फरीद) ने 13वीं शताब्दी में की थी। हेरोड्स गेट और अल-अक्सा मस्जिद के बीच येरुशलम के पुराने क्वाटर्स में पिछले 800 सालों से एक कोना भारत के नाम है। वर्ष 1200 के आसपास, सलाहुद्दिन अय्युबी की सेनाओं ने यरूशलम शहर से क्रूसेडर (सलेबी) को शहर से बाहर खदेड़ने को मजबूर कर दिया था, हजरत फरीद उद-दीन गंज शकर (बाबा फरीद) सूफी संत चिस्ती से संबंधित थे, जो आज भी पूरे भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फैले हुए हैं चिश्ती से सम्बन्ध रखते हैं।

उन्होंने अपने दिनों में अल-अक्सा मस्जिद के चारों ओर पत्थर के फर्श को साफ किया करते थे उसे चमकाने के लिए वहां काम करते थे। कोई नहीं जानता कि बाबा फरीद शहर में कब तक रहे। लेकिन पंजाब लौटने के कुछ समय बाद, जहां वह अंततः चिस्ती के प्रमुख बन गए और शहर की दीवारों के अंदर एक गुफा में चुप्पी में उपवास किया करते थे।

गौरतलब है कि भारतीय मुसलमान मक्का के रास्ते यरूशलेम जाकर गुज़रते समय यहां प्रार्थना करना शुरू कर दिए, जहां बाबा फरीद ने इबादत किया था, जहां वह सोते थे। धीरे-धीरे, वहां बाबा फरीद की स्मृति में एक तीर्थयात्रा या तीर्थयात्रा लॉज बन गया जो आठ सदियों से अधिक वह लॉज अभी भी वहां मौजूद है।

हजरत ख्वाजा फरीद्दुद्दीन गंजशकर भारतीय उपमहाद्वीप के पंजाब क्षेत्र के एक सूफी संत थे। जो आप एक उच्चकोटि के पंजाबी कवि भी थे। सिख गुरुओं ने इनकी रचनाओं को सम्मान सहित श्री गुरु ग्रंथ साहिब में स्थान दिया और इनकी रचनाओं को सभी लोगों तक पहुँचाया। आपको बता दें कि वर्तमान समय में भारत के पंजाब प्रांत में स्थित फरीदकोट शहर का नाम बाबा फरीद पर ही रखा गया था जहाँ काफी आबादी है। बाबा फरीद के शिष्यों में निजामुद्दीन औलिया को अत्यधिक प्रसिद्धि प्राप्त हुई। वास्तव में बाबा फरीद के आध्यात्मिक एवं नैतिक प्रभाव के कारण उनके समकालीनों को इस्लाम के समझाने में बड़ी सुविधा हुई इससे बहुत कम परेशानी झेलनी पड़ी।

लेकिन जेरूसलम के हेरोड्स गेट के पीछे की संकरी गलियों में काफी चहल कदमी और शोर-शराबा रहता है। वहां एक बाजार की तरह दुकानें लगती है, लाइन से कई फलों की, किराने का सामान और मोबाइल फोन की दुकाने हैं। और उस इलाके की सुरक्षा के लिए इस्राइली सैनिक सभी जगहों पर तैनात हैं। आपको बता दें कि पिछले करीब 90 सालों से अधिक समय से मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का रहने वाला अंसारी परिवार इस धर्मशाला की देख-रेख कर रहा है जो बहुत ही ईमानदार परिवार है।


खास बात यह है कि इस परिवार के सदस्यों ने स्थानीय फिलिस्तीनी लोगों से शादी कर ली है। लेकिन उन सभी के पास भारतीय पासपोर्ट हैं। इसके अलावा धर्मशाला के अंदर एक छोटी सी मस्जिद है, जहां भारतीय झंडा लगा है। धर्मशाला की वर्तमान में देखरेख करने वाले नजीर अंसारी कहते है कि सदियों से अल-अक्सा मस्जिद में प्रार्थना करने आने वाले भारतीय यहां रुकते रहे हैं और यहाँ नमाज़ पढ़ते हैं और आराम भी करते हैं।

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