अमरीका की बात मानने को तो ईराक़ी क़ुर्द भी नहीं तैयार; जानिये पूरा मामला

कुछ महीनों पहले ऐसा लगता था कि चीन अमरीका को टक्कर दे सकता है और कई बार ऐसा लगता था कि चीन अमरीका की कोई बात मानने को तैयार नहीं है. अब मगर ऐसा लग रहा है कि संयुक्त राज्य अमरीका जैसे शक्तिशाली देश की बात सुनने को नार्थ कोरिया भी नहीं तैयार है. इतना भी किसी हद तक ठीक कि नार्थ कोरिया अमरीका को युद्ध के लिए उकसा रहा है. मगर अब ईराक़ से ख़बर है कि कुर्दिस्तान की मांग करने वाली कुर्द भी अमरीका की बात को कोई एहमियत नहीं देते.

असल में कुर्दिस्तान रीजनल गवर्नमेंट(KRG) 25 सितम्बर को एक रेफेरेंडम करा रही है जिसमें आज़ादी को लेकर लोग मतदान करेंगे. ईराक़ी प्रधानमंत्री हैदर अल आब्दी इस रेफेरेंडम से खुश नहीं हैं, उन्हें लगता है कि जब बातचीत हो रही थी तो इस रेफ़रेंडम से मामला ख़राब होता है.दूसरी ओर KGR नेताओं को लगता है कि इस रेफ़रेंडम से आज़ादी की राह आसान होगी.

ऐसा नहीं है KRG के क़दम से ईराक़ ही नाराज़ है.कई और रीजनल शक्तियाँ भी इससे ख़ुश नहीं हैं जबकि सुपर पॉवर कहलाया जाने वाला संयुक्त राज्य अमरीका ने इस पर अपनी नाराज़गी साफ़ ज़ाहिर कर दी है. संयुक्त राज्य अमरीका ने इराक़ी कुर्द से अपील की थी कि वो अपना रेफेरेंडम फ़िलहाल रोक दें. अमरीका ने इसकी वजह ISIS से चल रहे युद्ध को बताया है. रेफेरेंडम की वजह से ISIS के ख़िलाफ़ युद्ध में ख़लल पड़ सकता है और इससे ISIS को मज़बूत होने का मौक़ा मिल सकता है.

इसकी एक और वजह है वैसे, जानकारों के मुताबिक़ इस रेफेरेंडम के बाद हैदर अल आब्दी की स्थिति कमज़ोर हो जाएगी और हो सकता है कि अगले ईराक़ी चुनाव में ऐसी सरकार बन जाए जो अमरीकी समर्थक ना हो.

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