एंटी NRC प्रदर्शनकारियों के पक्ष में फिर खड़े हुए फ़िल्म डायरेक्टर, इस तरह से..

January 14, 2020 by No Comments

दिल्ली के शाहीन बाग़ में CAA के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन को अब लगभग महीना होने वाला है जो अब दुनिया भर की नज़रों में आ गया है। कई बार पुलिस ने अपने “तरीके” से ख’त्म करने की कोशिश की लेकिन पुलिस को शाहीन बाग़ के इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन से नाकाम होकर लौटना पड़ा था। आज कोर्ट ने शाहीन बाग प्रदर्शन को लेकर पुलिस को आदेश दिया कि जनहित को ध्यान में रखते पुलिस अपना काम करे लेकिन इस कोर्ट के आदेश के बाद शाहीन बाग़ में प्रोटेस्ट करने वालों में बेचैनी है।

कोर्ट के आदेश और प्रदर्शनकारियों की बेचैनी को समझते हुए 31 जनवरी को रिलीज़ होने वाली फिल्म ‘गुलमकई’ जो पाकिस्तान की एक लड़की मलाला यूसफ़ज़ई के जीवन पर आधारित है के, निर्माता-निर्देशक एच ई अमजद खान दुबारा पहुंच गए हैं। अजमद खान के पहुंचते ही शाहीन बाग़ में प्रोटेस्ट कर रहे लोगों में और भी जोश देखने को मिला। अमजद खान ने एक समाचार चैनल से बात करते हुए कहा कि एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला।

अमजद खान ने CAA पर बात करते हुए कहा कि जिस जनता ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया उसी जनता से अब भारतीय होने का सुबूत मांगा जा रहा है,खान ने आगे कहा कि उन लोगों के पास देश और देश की जनता के लिए कुछ अच्छा काम करने का प्लान है नही ना उनसे कुछ होने वाला है इसलिए अपनी नाकामी छुपाने के लिए मंदिर मस्जिद, हिन्दू मुसलमान, पाकिस्तान और अब CAA NRC में उलझा दिया है। आपको बता दें कि 12 जनवरी को भी अमजद खान मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे और जामिया, शाहीन बाग और JNU में हो रहे प्रोटेस्ट में शामिल होकर CAA को एक घटिया एक्ट बताते हुए केंद्र की सरकार को तानाशाह बताते हुए हमलावर रुख अपनाया था।

आज शाहीन बाग पर कोर्ट के आदेश की जानकारी होने पर फौरन फिरसे शाहीन बाग पहुंच गए और प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया। यहां आपको ये बता देना ज़रूरी है कि एच ई अमजद फ़िल्म निर्माता निर्देशक के साथ साथ यूनाइटेड नेशन के गुड विल एम्बेसडर,फाइट में पांच बार के वर्ल्ड चैंपियन,पेंटर और राइटर भी हैं। सबसे ज़्यादा गौर करने वाली बात ये है कि अमजद खान की फ़िल्म ‘गुलमकई’ 31 जनवरी को रिलीज़ हो रही है और ऐसे में CAA के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर कर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला करना बड़ा रिस्क लेने जैसा है. फ़िल्म गुल मकई की कहानी पाकिस्तान की एक्टिविस्ट ‘मलाला यूसफ़ज़ई’ के जीवन पर आधारित है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *