अपील: रोहिंग्या लोगों के ख़िलाफ़ नफ़रत के प्रोपगंडा को रोकें; “छी न्यूज़” से बचें..

एक तरफ़ रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ़ म्यांमार सरकार ने ज़ुल्म की इंतिहा कर रखी है तो दूसरी ओर हमारे अपने देश में कुछ लोग ऐसे हैं जो नफ़रत फैलाने के इरादे से सोशल मीडिया पर रोहिंग्या लोगों के बारे में अफ़वाह और झूठी ख़बरें फैला रहे हैं. अजीब ओ ग़रीब आंकड़े दिखा कर एक समाज के लोगों के ख़िलाफ़ नफ़रत भड़काने की कोशिश हो रही है.

भारत में जिस प्रकार की मीडिया है उसके बारे में हम जानते हैं कि इसका एक हिस्सा ऐसा है जो लगातार दंगा भड़काने के ही काम में लगा हुआ है. हमें ये समझना होगा कि नफ़रत भड़काने वाले इन लोगों से सावधान रहना है. सही बात तो ये है कि इनमें से जो जानबूझकर ऐसी हरकत कर रहा है उससे तुरंत नाता तोड़ा जाए.

जिन्हें ये तक नहीं मालूम कि बर्मा और म्यांमार दो नहीं एक ही देश हैं, वो लोग भी रोहिंग्या लोगों को आतंकवादी बताने में लगे हैं. केंद्र सरकार के मंत्रियों के बयानों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने वाले इन लोगों से सावधान रहने की सख्त ज़रुरत है.हालाँकि कुछ मंत्रियों को भी ये समझना चाहिए कि वो भारत जैसे विशाल और विविधता से भरे-पूरे देश की सरकार में मंत्री हैं.

रोहिंग्या मुसलमानों का सच के नाम से बहुत कुछ झूठ आपको whatsapp के ज़रिये भेजा जा रहा है. कुछ मेसेजेस में बीबीसी का नाम लेकर रोहिंग्या लोगों को गाली दी जा रही है. अगर आप बीबीसी या दूसरी बड़ी वेबसाइट पर जायेंगे तो मालूम हो जाएगा कि ऐसी कोई भी बात नहीं है बीबीसी पर जो रोहिंग्या मुसलमानों को किसी प्रकार की हिंसा में या अपराध में सम्मिलित होने की बात करे. हाँ कुछ भारतीय मीडिया हाउस ज़रूर हैं जिन्हें “छी न्यूज़” के नाम से जाना जाता है वो ज़रूर रोहिंग्या लोगों को बदनाम करने के लिए झूठी अफवाहें चला रहे हैं और उन्हें समाचार का नाम दे रहे हैं.

हम सभ्य समाज के लोगों से ये अपील करेंगे कि किसी भी ऐसी अफ़वाह जिसमें किसी समाज को गाली दी गयी हो उसको तुरंत ब्लाक करिए.ऐसी अफ़वाहों को फॉरवर्ड बिलकुल ना करिए, कोई शक हो तो अच्छे से पड़ताल कीजिये लेकिन इस नफ़रत के एजेंडे का हिस्सा ना बनिए.

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