दंगाई मानसिकता वालों को सेना प्रमुख का सन्देश-‘धार्मिक सहिष्णुता भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा’

पंजाब : जनरल बिपिन रावत भारतीय सेना प्रमुख हैं ये भारतीय थल सेना के 27वें जनरल हैं। जनरल दलबीर सिंह के रिटायर होने के बाद जनरल बिपिन रावत ने भारतीय सेना की कमान 31 दिसंबर 2016 को संभाली थी। जनरल बिपिन रावत का परिवार कई पीढ़ियों से भारतीय सेना में सेवा दे रहा है। इनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्षमण सिंह रावत थे जो कई सालों तक भारतीय सेना का हिस्सा रहे। जनरल बिपिन रावत इंडियन मिलिट्री एकेडमी और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में पढ़ चुके हैं। इन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस सर्विसेज में एमफिल की है।

जनरल बिपिन रावत शनिवार को डुगरी स्थित सतपाल मित्तल स्कूल के आडीटोरियम में नेहरू सिद्धांत केंद्र की ओर से आयोजित सतपाल मित्तल नेशनल अवार्ड 2018 के समागम में बतौर मुख्य अतिथि हाजिर हुए थे। छात्रों के बड़े पैमाने पर शामिल दर्शकों को संबोधित करते हुए रावत ने कहा कि धार्मिक सहिष्णुता भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है और इसे बनाए रखा जाना चाहिए और संरक्षित किया जाना चाहिए। रावत ने आगे कहा कि नागरिकों को यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है और इसे हर कीमत पर बनाए रखा जाना चाहिए। “हमारा देश इस कदम पर है। हम बढ़ रहे हैं और बढ़ रहे हैं। हमारे पास एक बहुत ही मजबूत सांस्कृतिक विरासत है जिसे हमें सम्मानित करना चाहिए। 

उन्होंने आगे कहा कि असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो तुम, कहां खामियां रह गईं, इस पर विचार करो तुम, आगे बढ़ते चलो तुम, सफलता जरूर तुम्हें मिलेगी। फिर उस नई सफलता के साथ परचम लहराए चलो तुम कविता सुनाकर बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

उन्होंने अवार्ड बांटे और स्कूली बच्चों को संबोधित किया। जनरल रावत ने अपने स्कूली समय में टीचर की ओर से सुनाई जाने वाली कविता भी बच्चों को सुनाई और बताया कि वह असफलता से न डरें। उन्होंने बच्चों से कभी मेहनत करने के बावजूद सफलता नहीं मिलती तो वह असफलता से डरे नहीं, बल्कि हमेशा असफलता से शिक्षा लेनी चाहिए। खुद पर और सिस्टम पर विश्वास रखना चाहिए।

जनरल बिपिन रावत 16 दिसंबर 1978 में गोरखा राइफल्स की फिफ्थ बटालियन में शामिल हुए। यहीं उनके पिता की यूनिट भी थी। 1 सितंबर 2016 को जनरल बिपिन रावत भारतीय थलसेना के वाइस चीफ नियुक्त किए गए थे। दिसंबर 2016 में भारत सरकार ने जनरल बिपिन रावत से वरिष्ठ दो अफसरों लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीन बक्शी और लेफ्टिनेंट जनरल पीएम हारिज को दरकिनार कर भारतीय सेना प्रमुख बना दिया। 

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