“अशफ़ाक़ की आख़िरी रात”, एक काव्य रचना को इतिहास का दर्जा देने की कोशिश…

December 19, 2017 by No Comments

आज शहर की छुट्टी है,अधिकारिक तौर पर सभी स्कूल कॉलेज बंद हैं, शहर शाहजहाँपुर के तीन अफ़राद को आज अंग्रेजी हुकूमत ने फाँसी दे दी थी , आज शहर का शहीद दिवस है, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक उल्लाह ख़ाँ, ठाकुर रोशन सिंह.
शहर में एक कवि हुए अग्निवेश शुक्ल जिनका 45 साल की अल्प आयु में ही 2004 में देहांत हो गया उन्होंने सन 2000 के आसपास एक काव्य रचना की “अशफ़ाक़ की आख़िरी रात ” , कविता रूप में एक अच्छा संस्मरण है. यह काव्य रचना लेकिन पिछले कुछ सालों से देखने में आ रहा है कि देश में अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ाँ दिखाने की कोशिश शुरू हो गयी है.

कई जगह उस काव्य रचना की पंक्तियाँ अशफ़ाक़ की कही पंक्तिओं के रूप में लिखी दिख जाती हैं. साल भर पहले आजतक चैनल पर उसके एंकर इंटरव्यू में एक विद्वान् से उस काव्य रचना में कहे शब्द अशफ़ाक़ उल्लाह ख़ाँ के बताकर सवाल पूछ रहे थे और वो विद्वान् चूँकि काव्य रचना के बारे में नहीं जानते इसलिए असहज थे. 

जो माहौल है उसमें हो सकता है कल कहा जाए कि अशफ़ाक़ को उतना ही और वैसा ही मानो जैसा “अशफ़ाक़ की आख़िरी रात ” में दर्ज है और उस काव्य रचना को इतिहास का दर्जा दे दिया जाए तो अब अतिश्योक्ति नहीं होगी. बाक़ी शहर में स्थित राम प्रसाद बिस्मिल का घर उनके परिजनों ने आर्थिक तंगी के चलते बेच दिया था.

जिसको उसके मौजूदा मालिक से उचित मूल्य पर खरीद संग्रालय बनाने की मांग उठती रहती है लेकिन किसी सरकार को इलेक्शन बाद बिस्मिल याद नहीं रहते हैं. आज के दिन उन महान आत्माओं को यही मेरी श्रद्धांजली है कि सही स्थिति सामने रख दूँ जो वक़्त ज़रूरत काम आए.

~

फ़रहान ख़ाँ 

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *