ज़हनी दबाव कम करने में पेंटिंग है मददगार: अश्मा इज़्ज़त

October 16, 2018 by No Comments

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक अनूठा क़दम समाजसेवी संगठन “नर्चर लाइफ” ने डीकैथ्रान के साथ मिलकर मेटल हेल्थ जागरूकता अभियान के ज़रिये “वाक अ थान” का आयोजन किया, राजधानी में सुबह सुबह सैकड़ो महिलाओ युवाओ और बच्चो ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और रिवरफ्रंट स्थ्ति हैप्पीलेन से 1090 तक वाक किया, इस कड़ी में उत्तर प्रदेश राजधानी लखनऊ की जानी मानी क्रिमनल लॉयर अश्मा इज्ज़त की पेंटिंग की प्रदर्शनी भी लगाई गयी!


मेंटल हेल्थ के मामले में संयुक्त राष्ट की रिपोर्ट को माने तो भारत में हर 6ठवा इंसान दिमाग़ी तौर पर परेशान है, इसके लिए मनोव्ज्ञानिक जानकार के मानना है की जेहनी तनाव को दूर करने के लिए पेंटिंग एक अनूठा माध्यम बन सकता है! पेशे से वकील अश्मा इज्ज़त ने अपनी पहली प्रदर्शनी रिलीज़ पर पत्रकारों को बताया की मेंटल हेल्थ को भारत में एक स्टिग्मा की तरह देखा जाता है लोग अपनी परेशानी को छिपाते है मेकअप की तरह, रिपोर्ट कहती है भारत में हर छठा इंसान दिमाग़ी तौर पर परेशान है, और इसमें औरतो की संख्या ज्यादा है क्यूंकि औरते अपनी जेहनी दबाव को मर्दों के मुकाबले साझा नहीं करती है और तनहा इस दंश को जूझती है.

ज़रूरत है इस सोशल स्टिग्मा को तोड़ने की, इसमें कसरत के साथ साथ आर्ट थेरेपी बहुत मददगार साबित होती है, पेन्टिंग द्वारा आप अपने ख्यालात को कैनवास पर उतार देते है और जबतक आप पेंटिंग बनाते है उतनी ही देर में आप दिमाग एकाग्र होता है नेगेटिव सोच को दूर भगाने में पोसिटिव सोच की तरफ बढ़ने में आर्ट एक प्यारा ज़रिया बन सकता है!

अश्मा इज्ज़त ने कहा की वोह चाहती है औरतो को मेटल हेल्थ जागरूकता के लिए वोह ऐसी प्रदर्शनिया करती रहे इसके लिए कुछ स्कूलो ने उनसे संपर्क किया है उन्होंने बताया की वोह खुद वकालत और घरेलु ज़िम्मेदारियो से वक़्त निकाल कर 3-4 घंटे पेन्टिंग करती है जिनसे उन्हें ज़हनी सकून और आर्ट के ज़रिये अपने ख्यालात के इज़हार का मौक़ा मिलता है!

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