जानिये सच्चाई: “ओपिनियन पोल” क्यूँ दिखा रहा है HP में कांग्रेस की हार!

October 25, 2017 by No Comments

हिमाचल प्रदेश और गुजरात में चुनाव को लेकर माहौल पूरी तरह से तैयार है. हिमाचल में तो चुनाव की घोषणा भी हो गयी है जबकि गुजरात में भी बस होने ही वाली है. अब जबकि पूरा सियासी माहौल बन चुका है तो ओपिनियन पोल का दौर भी शुरू है. वैसे ये ओपिनियन पोल किसका ओपिनियन होते हैं इस पर भी कई सवाल हैं.

ज़्यादातर ओपिनियन पोल एक कमरे के अन्दर बैठ कर बन जाते हैं. कुछ लोगों को फ़ोन किया जाता है और अक्सर ये वो लोग होते हैं जिन्हें ओपिनियन पोल करने वाला जानता है तो ऐसे में वो उसके जानने वाले एक ही राजनीतिक सोच वाले होते हैं या यूँ भी कह सकते हैं कि वो उन्हीं से बात करता है जिनसे वो करना चाहता है. असल में इस मामले में किसी तरह की कोई इमानदारी नहीं रखी जाती बस काम है और अपनी राजनीतिक सोच वाली पार्टी को जिताना है, बस यही सोचना होता है.

हिमाचल प्रदेश और गुजरात दोनों ही राज्यों के लिए कुछ ओपिनियन पोल सामने आये हैं और दोनों ही ओपिनियन पोल इस तरह के लगते हैं कि पुराने चुनाव में आये नतीजों के आधार पर बनाए गए हैं. एक ओपिनियन पोल के मुताबिक़ हिमाचल प्रदेश में सरकार तो भाजपा की बनेगी लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में पहली पसंद कांग्रेस नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह है. ऐसा भी नहीं कि मामला आसपास का है. भाजपा नेता जेपी नड्डा वीरभद्र की पॉपुलैरिटी में कहीं भी नहीं ठहरते. अब समझने की बात ये है कि फिर इस ओपिनियन पोल में कांग्रेस को चुनाव क्यूँ नहीं जिताया गया. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि ओपिनियन पोल बनाने वाला ये मानता है कि राज्य में एक बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस जीतती है और ऐसे में इस बार भाजपा को ही जीतना चाहिए. पिछले कुछ चुनावों में ऐसा हुआ भी है लेकिन ऐसा इस बार भी होगा ये कहना ठीक नहीं. परन्तु ओपिनियन पोल का आधार अगर ये है तो ठीक नहीं है. गुजरात के ऊपर आये ओपिनियन पोल भी इसी तरह से हैं. पिछले चुनावों के आधार पर एक विश्लेषण कर दिया गया है, ऐसा ही लगता है.

अब ओपिनियन पोल दिखाने वाले ये कहते हैं कि उन्होंने जनता से सवाल पूछे हैं लेकिन अगर कभी जनता से ये पूछा जाए कि उनसे किसी ने इस सन्दर्भ में सवाल पूछा है तो मालूम चलेगा कि ऐसा कभी नहीं हुआ. बहरहाल, बेहतर तो यही है कि ओपिनियन पोल के नाम पर आने वाले प्रोपगंडा में जनता ना फंसे.

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