बीजेपी के राज में महिलाओं पर अत्याचार बढ़ा है: कन्हैया कुमार

November 23, 2017 by No Comments

जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार आज लखनऊ में एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे जहाँ उन्होंने केंद्र में बैठी मोदी सरकार और दक्षिणपंथी संगठन आरएसएस को आड़े हाथों लिया। कन्हैया ने इस दौरान बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह महिलाओं के हितेषी होने का झूठा दावा करती है। लेकिन उनकी बेसिक जरूरतों की चीज़ों को महंगा कर रही है।

मोदी सरकार ने जीएसटी महिलाओं द्वारा हर महीने यूज किए जाने वाले सेनेटरी नैपकिन को लक्ज़री आइटम में रखा है। ये महिलाओं के जरूरत की एक आम चीज है। लेकिन मोदी सरकार को ये लक्ज़री आइटम लगती है और जो हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सूट पहन कर इधर-उधर घूमते हैं। वह लक्ज़री आइटम नहीं है। अगर आपको एक सेनेटरी नेपकिन इतना ही लक्ज़री लग रहा है तो आप भी इसे जेब में लेकर क्यों नहीं घुमते हैं ?
महिलाओं पर अत्याचार के बारे में बात करते हुए कन्हैया ने कहा कि बीजेपी को लगता है की स्मृति ईरानी को केंद्रीय मंत्री बनाकर महिलाओं पर अत्याचार कम हो गया है। लेकिन बीजेपी के राज में तो ये और भी बढ़ गया है।
बीजेपी की दोहरी नीतियों पर कटाक्ष करते हुए कन्हैया ने कहा की देश में जीएसटी लागू कर प्रधानमंत्री मोदी ने “वन नेशन, वन टैक्स” की परिभाषा दे डाली। लेकिन ये देश के बाकी समस्याओ के लिए क्यों काम नहीं करता। जैसे कि एजुकेशन और हेल्थ सर्विस में ऐसा क्यों नहीं किया जाता।
गुजरात और कश्मीर को एक नजर से क्यों नहीं देखा जाता है ? अगर गुजरात में लोगों ने राहुल गाँधी की कार पर पत्थर मारे तो वह गुजरात की जनता का गुस्सा है। वहीँ कश्मीर में अगर लोग पत्थर उठाते हैं तो उन्हें पीटा जाता है। हम सब कहते हैं की कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी, भारत माता एक हमारी। लेकिन इसपर बीजेपी दोहरी नीति क्यों अपनाती है ?
बीजेपी ने ऐसा माहौल बनाया हुआ है कि इनसे कोई सवाल नहीं पूछता है। जब भी इनसे सवाल पूछते हैं तो सारा खेल विपक्ष पर डाल देते हैं। जब भी इनसे देश में बढ़ रही महंगाई के बारे में कुछ पूछा जाता है तो ये कहते हैं कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने देश को मिलकर लूट लिया है। तो इनसे पूछना चाहिए की आप फिर इस लूटी हुई जनता पर इतना टैक्स क्यों लगा रहे हैं।
जनता से इतना टैक्स वसूला जा रहा है, लेकिन माल्या से कर्ज वापिस लेने में इनको कोई दिलचस्पी नहीं है। किसान रो रहा है, उसका कर्ज माफ़ करने के लिए इनके पास पैसा नहीं है।

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