एक औरत की शिकायत-“मेरे बेटे ने मेरे साथ ज़िना किया”,हज़रत अली ने फैसले में लड़के को बरी किया क्युकि माँ ही..

माँ और बेटे का रिश्ता बड़ा पाक है इस तरह के रिश्ते में कुदरत ने ऐसी मोहब्बत कर दी है कि शायद ही दुनिया का कोई और रिश्ता हो लेकिन कुछ लोग ऐसे होते है जो इस रिश्ते पे भी ऐसे दाग लगा देते है जो सुनने में हैरान करने वाले है.ऐसे वाकिये पहले भी आते थे.

एक ऐसा ही मामला,हज़रत अली के दौर में भी आया था,हज़रत अली के दौर में एक औरत इन्साफ के लिए उनके पास आई और कहाकि हज़रत अली एक लड़के ने मेरे साथ जिना किया है.

औरत की शिकायत पे हज़रत अली ने तुरंत हुक्म दिया,गुनाहगार को गिर”फ्तार करके सज़ा दी जाए,हज़रत अली के हुक्म की तामीर करते हुए आरो”पी लड़के को गिर”फ्तार करके जब स’ज़ा की तैयार चल रही थी.

लड़का जोर जोर से रो रहा था और कह रहा था वो बेगुना’ह है,और उसे उसकी माँ ही फंसा रही है,लड़का इतना जोर से चि’ल्ला रहा था कि हज़रत अली के कानो में उसकी आवाज़ पहुच गयी.

हज़रत अली ने इसके बाद उस लड़के को अपने पास लाने का हुक्म दिया,उन्होंने लड़के से पूछा,तुम पे जिना का इलज़ा’म है तुम अपनने को बेगुना”ह बता रहे है अगर तुमने ये नही किया है और तुमको इसके सबूत देने होंगे.

इस पर लड़ने ने कहाकि हज़रत अली जिसने इलज़ाम लगाया है वो मेरी माँ है और एक बेटा अपनी माँ के साथ ऐसा कैसे कर सकता है.ये सुनकर हज़रत अली ने स’ज़ा को टाल दिया और इलज़ाम लगाने वाली औरत को के’स की सुनवाई में बुलाया.

हज़रत अली ने औरत से पूछा,क्या आप इस लड़के की माँ है,इस पर औरत ने कहा,लड़का सज़ा से बचने को झूठ बोल रहा है.इस पर हज़रत अली ने कहाकी,ठीक है मेरा फैसला ये है तुम्हारा इस लड़के के साथ निकाह होगा.

ये सुनकर औरत घबरा गयी और आनाकानी करने लगी,इसके बाद हज़रत अली बोले-मैंने मालूम कर लिया है तुम झूठ बोल रही हो,इस लड़के ने कई लोगो की गवाही दिलवा के साबित किया है तुम इसकी माँ हो और निकाह से तुमने आनाकानी की वो इस बात और पुख्ता कर रही है.

हज़रत अली ने आगे कहां,तुम माँ होकर अपने बेटे को गलत इलज़ाम लगवा के सजा दिलवाना चाह रही हो,ऐसा क्यों कर रही हो बताओ.इस पर औरत ने कहाकि ये सही है ये मेरा सगा बेटा है,मेरी इसकी नही बनती है.

मेरे और बेटे के बीच अक्सर नोक्जोक होती है,इसके वालिद इ’न्तेकाल कर चुके है और मेरी दुसरे मर्द से शादी हो चुकी है,मेरे शौहर को इस लड़के ने एक दिन बहुत पीटा जिसके बाद शौहर ने मुझे हुक्म दिया कि वो इसको स’ज़ा दिलवाए.

मैंने अपने शौहर की बात मानी और इल’ज़ाम लगा दिया,ये सुनकर हज़रत अली ने औरत के शौहर को पकडवा के औरत के साथ कोड़े मर’वाए और लड़के को मुक’दमे से ब’री कर दिया.

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