औरतों की इस्लामी सोच व् फ़िक्र कैसी हो?क्या औरत सिर्फ घर में काम करने के लिए हैं?हर मुसलमान ज़रूर देखें

दोस्तों अस्सलाम वालेकुम व रहमतुल्ला हे व बरकातहू दोस्तों आज हम आपको औरत की इस्लामी सोच क्या होनी चाहिए इसके बारे में बताएंगे इस्लाम को लेकर उनकी सोच और फिर क्या हुआ आज हम इसका तस्किरा करेंगे दोस्तों आपको बता दें कि औरत कपड़ा धोने वाली जात को नहीं कहते औरत बर्तन झाड़ू करने वाली जात को नहीं कहते दोस्तों औरत के बारे में हमारे नबी ने फरमाया है कि मैंने अपनी उम्मत की औरतों की इज्जत को आगे से बुलंद कर दिया है दोस्तों एक मर्तबा राबिया बसरी से किसी ने कहा कि राबिया तुझे पता है कि अल्लाह ने किसी औरत को नबुवत नहीं दी.

यानी किसी औरत को नबी बनाकर नहीं भेजा बोलने वाले का मतलब यह था कि मर्द को ज्यादा इज्जत दी गई तो रबिया बसरी ने जवाब दिया कि हां अल्लाह ने किसी औरत को नबुवत नहीं दी लेकिन जितने भी नबी भेजे हो सब एक औरत के पेट में ही पेट हैं दोस्तों इस्लाम में औरतों को इतनी इज्जत दी गई है कि उन्हें नाम लेकर पुकारना भी सही नहीं होता नबी ने फरमाया है कि अगर तुम अपनी बीवियों का नाम लेकर बुलाते हो तो यह उसकी मोहब्बत के खिलाफ है अल्लाह ने कुरान में इतनी औरतों का जिक्र किया है.

लेकिन कभी किसी का नाम नहीं लिया सिर्फ एक ही औरत को अल्लाह ने कुरान में नाम लिया और वह मरियम थी और दोस्तों मरियम का नाम अल्लाह ने क्यों कुरान में लिया क्योंकि ईसाईयों ने यह बात कही कि मरियम अल्लाह की बीवी है और अल्लाह पाक ने मरियम का नाम लेकर साफ बता दिया कि वह अल्लाह की बीवी नहीं है क्योंकि अगर बीवी होती तो अल्लाह का नाम नहीं लेता बल्कि वह मेरी बंदी है.

दोस्तों इस्लाम में यह है कि शौहर बीवी का नाम ना ले और बीवी शौहर का नाम ना ले लेकिन अगर ले लेता है तो कोई गुनाह नहीं है दोस्तों तो आप यह बात से अंदाजा लगाइए की औरत कितनी अज़ीम है.

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