बच्चा पैदा होने पर मुस्लिम के लिए ये काम करना क्यों है ज़रूरी?…हर मोमिन को ये होना चाहिए पता

March 8, 2021 by No Comments

हमारे घरों में जब बच्चे पैदा होते हैं तो हम यही चाहते हैं कि बच्चा नेक बने और हम उसे पैदा होते हैं, तमाम ख़्वाहिश करने लगते हैं कि बच्चे की इस तरह से परवरिश करेंगे,जिस से बच्चा आगे चल कर नेक बने और इस्लामी तरीकों पर चले.दोस्तों बच्चों को इस्लामी तालीमात से शनासा करने और उन्हें इस्लामी आदाब-ए-ज़िंदगी सिखाना माँ बाप का फ़र्ज़ औ्वलीन है।
माँ बाप के लिए ज़रूरी है कि अपने बच्चों की ऐसी तरबियत करें कि बच्चे बड़े हो कर बुराई से दूर रहें और कोई ऐसा गलत काम न करें,जिस से समाज में माँ बाप की रुसवाई हो, या ब्च्चे समाज से अलग थलग पड़ जाएँ.बच्चे के कान में अज़ान कहने का मक़सद भी यही है कि एक तो बच्चे के कान में सबसे पहले ज़िक्र इलाही की आवाज़ पहुँचती है।

दूसरा अज़ान से शैतान भागता है और बच्चा शैतान के शर से महफ़ूज़ रहता है।और बच्चा शैतान के मकर और फरीब से बच जाता है।गोया जब नोमोलूद अज़ान की सूरत में इशक़ इलाही का तराना सुनता है तो पैदाइश के वक़्त से ही इस आफ़ाक़ी हुक्म से मानूस हो जाता है जो ज़िंदगीयों में इन्क़िलाब लाने के लिए भेजा गया।
बच्चे के दाएं कान में अज़ान और बाएं कान में इक़ामत कही जाती है।इस का एक फ़ायदा ये होता है कि ये अज़ान ना सिर्फ बचे बल्कि उस की माँ के लिए भी बरकत का बाइस बनती है।हज़रत इमाम हुसैन रज़ी अल्लाहु अनहु रिवायत करते हैं कि अल्लाह के नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहु अलैहि वाला वसल्लम ने फ़रमाया जिसके हाँ बच्चे की विलादत हो तो वो उस के दाएं कान में अज़ान और बाएं कान में इक़ामत कहे,उस की बरकत से बच्चे की माँ को कोई चीज़ नुक़्सान ना पहुंचा सकेगी।और वह शैतान के शर से महफूज रहेगा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *