“बनारस ने दिखाया है कि भारतीय समाज जग रहा है”

September 26, 2017 by No Comments

बनारस हिन्दू विश्विद्यालय में छात्राओं से हुई छेड़खानी के ख़िलाफ़ हुए विरोध प्रदर्शन पर लाठीचार्ज की पूरे देश में निंदा हो रही है. लड़कियों से हुई छेड़खानी और उस पर प्रशासन के रवैये की हर तबक़े के लोगों द्वारा आलोचना की गयी है.

लखनऊ विश्विद्यालय के पाश्चात्य इतिहास विभाग के पूर्व HOD और वरिष्ट राजनीतिक विश्लेषक प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है. उन्होंने फ़ेसबुक पोस्ट के ज़रिये BHU की छात्राओं का समर्थन किया है. उनके विचार हम यहाँ साझा कर रहे हैं…

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की हमारी बच्चियों ने जिस प्रकार अपनी आवाज बुलंद की है और विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिस प्रकार उनके साथ क्रूरता और वहशीपन का व्यवहार किया है वह आधुनिक भारतीय इतिहास का एक काला पन्ना है.

ऐसा लगता है यह बच्चियां हमारे अपने परिवारों की नहीं किसी और नस्ल और राष्ट्र की है और प्रशाषन किसी और नस्ल और राष्ट्र का है. ऐसा तो अंग्रेजी राज में भी कभी नहीं हुआ. देश को समझना होगा की समाज बदल रहा है. अगर हम अपने बच्चों और बच्चियों की आवाज को नहीं सुनेंगे तो उसका खामियाजा हमीं को भोगना होगा. इनकी आवाज एक विश्वविद्यालय से दुसरे विश्वविद्यालय तक उठने लगी है. उसमे बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय जैसे परंपरागत विश्वविद्यालय की बच्चियों द्वारा आवाज उठा देना कुछ अर्थ रखता है.

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय तो जे न यू नहीं है. एक न एक दिन हमें यह समझना ही पड़ेगा की इस तरह हर जगह से उठने वाली हर आवाज गलत नहीं होती. उसको अनसुना करना तथा उसे लाठी और बन्दूक के बल पर दबा देना संभव नहीं होता. बनारस ने दिखाया है कि भारतीय समाज जग रहा है, उठ रहा है. हमें उसे सुनना ही होगा और कुछ न कुछ ठोस करना ही होगा. कोई भी समाज इस तरह आत्महत्या नहीं कर सकता.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *