अगर किसी बीमारी से परेशान है तो पैगम्बर मुहम्मद (स.अ.व.) का फरमान ज़रूर सुने,बीमार होने वाला..

अस्स्लामालेकुम दोस्तों,हम अपनी इस पोस्ट के माध्यम से ज़रूरी इस्लामिक जानकारी देते रहते है हमें उम्मीद है आपको इस्लामिक जानकारी पसंद आ रही होगी.आज हम बीमारी पर रसूल स.अ.व. ने जो फरमाया है उसको आपको बतायेंगे.दोस्तों ये आम बात हो गयी है जब लोग किसी बीमारी में कई दिन से घिरे रहते है और इलाज़ में फायदा नही होता है ऐसी सूरत में मायूस हो जाते है.


हलाकि इस्लाम में मायूस होने की मनाही है लेकिन कई लोगो के सवाल होते है उनका अल्लाह सुन नही रहा है जबकि वो दीनदारी में रहते है और लम्बे समय से बीमार होते है तो ऐसी सुरत में ना जाने क्या बकते रहते है.

यकीनी तौर पे जिस्मानी परेशानी जो बीमार की शक्ल में होती है उससे इंसान टूट जाता है लेकिन अल्लाह से दुआ मांग कर आराम मिलने के लिए करनी चाहिए.

मायूसी कुफ्र है

अल्लाह की नाशुक्री करना बहुत बड़ा गुनाह है.अल्लाह हम मुसलमानों को ऐसे गुनाहों से बताये क्युकि पैगम्बर मुहम्मद स.अ.व. ने इरशाद फरमाया कि किसी भी सूरत में अल्लाह की नाशुक्री नही करना चाहिए.

बीमार होने पर जो दुनिया में तकलीफ होती है उसको अल्लाह आखरत में नेकी के रूप में जोड़ता है ये एक तरह से गुनाहों से बक्शीश करवाती है.हज़रत अबू हुरैरा ब्यान करते है कि एक शख्स रसुअल्लाह के पास आया.

बुखार आने पर हुजुर स.अ.व. ने कहा

और बुखार को ही भला बुरा कहने लगा जिस पर हुजुर स.अ.व. ने फरमाया कि इसे गाली ना दो,भरा बुरा ना करो,बुखार की तकलीफ ऐसे गुनाहों को खत्म कर देती है जैसे आग से लोहे का कचड़ा खत्म हो जाता है.

दोस्तों हमें अल्लाह के दीन और पैगम्बर मुहम्मद स.अ.व. की सुन्नत पे चलना चाहिए,दुनिया की ज़िन्दगी एक इम्तिहान और आखरत ही सच्चाई है.इसलिए जैसा हुजुर ने फरमाया वो हर मुस्लिम के लिए एक फरमान.

आपको हमारी ये जानकारी कैसी लगी.कमेन्ट बॉक्स में लिख कर ज़रूर बताये.इस जानकारी को सदके ज़ारिया मानके दूसरे तक या तो बता के पहुचाये या शर सोशल मीडिया पे शे”यर करके पहुचाये.

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