ह'मबिस्त'री का बीबी क्या इंकार कर सकती है?…अल्ला'ह के रसू'ल ने फ़रमाया

March 23, 2019 by No Comments

डॉक्टर फरहत हाशमी साहिबा का एक विडियो वायरल हो रहा है,जिस में वह बयान करती हैं कि बीवी को अपने शौहर की बात माननी चाहिए,और बात मानने में सिर्फ यह नहीं है कि जब वह खाना मांगे तो खाना दे दिया जाये,या पानी मांगे तो पानी दे दिया जाये,बल्कि जब वह अपनी बीवी को ह’मबिस्त-री करने के लिए बुलाये तो उस पर भी राज़ी हो जाना चाहिए.
अगर कोई अपनी बीवी को ह’मबिस्त-री करने के लिए बुलाता है और वह नहीं आती है,तो धीरे धीरे घर ब’र्बाद हो जाता है और शौहर की मोहब्बत में कमी आने लगती है जिसकी वजह से एक दिन बीवी को पछताना पड़ता है।अगर शौहर घर आता है और अपनी बीवी से ठंडा पानी या अच्छा खाना खाने की ख़ाहिश का इज़हार करता है.

और औरत इनकार कर देती है तो वो ख़ुद फिरीज़ के पास जाकर पानी पी सकता है या किसी बेहतरीन रेस्टोरेंट में जाकर बेहतरीन और लज़ीज़ खाना खा सकता है।गौरतलब बात ये है कि अगर शौहर बीवी से ह’मबि’सतरी और मुबाशरत की ख़ाहिश का इज़हार करता है और बीवी इनकार कर देती है तो फिर शौहर कहाँ जाएगा?
हो सकता कि बाहर जाकर किसी हरा-म काम का मुर्तक़िब हो,या बीवी से उसका दिल उचाट हो जाये,और वो कुछ और सोचने लगे।जब बीवीयां मुबाशरत से ज़्यादा मना करने लगेंगी तो शौहर भी ह’राम काम के ज़्यादा मुर्तक़िब होने लगेंगे।फिर इस तरह से मुआशरा आहिस्ता-आहिस्ता टूट-फूट का शिकार होना शुरू हो जाएगा।

इसी वजह से शरीयत ने इस किस्म की औरतों के साथ स’ख्ती की है,और उन पर ला’नत फरमाई है।चुनांचे हदीस में अल्ला’ह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम इरशाद फ़रमाते हैं अगर मर्द औरत को बिस्त-र पर बुलाए और वो मना कर दे तो सुबह होने तक फ़रिश्ते उस औरत पर ला’नत करते रहते हैं (बुख़ारी किताब अलनकाह )
एक और हदीस में अल्ला’ह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम फ़रमाते हैं अगर औरत ऐसी हालत में रात गुज़ारे कि वो अपने शौहर के बिस्त’र पर ना हो तो फ़रिश्ते उस वक़्त तक इस पर लानत करते हैं जब तक वो बिस्त’र पर वापिस नहीं आ जाती.अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम फ़रमाते हैं क़सम इस ज़ात की जिसके हाथ में मेरी जान है अगर किसी औरत को इस का शौहर बिस्त’र पर बुलाए और वो उसे मना कर दे तो जब तक वो औरत से राज़ी नहीं हो जाता अल्ला’ह इस से नाराज़ रहता है मुस्लिम।

इस लिए औरत के लिए ये जायज़ नहीं है कि वो शौहर के बुलाने पर उसे मना करे सिवाए इस के कि इस का कोई शरई उज़्र ना हो।इमाम इबन हिज्र फ़तह अलबारी में फ़रमाते हैं इस हदीस में ये फ़ायदा है कि मुबाशरत पर मर्द का सब्र औरत से ज़्यादा कमज़ोर है।

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