आज का बड़ा सवाल- क्या मीडिया बिकाऊ है?

November 25, 2017 by No Comments

बार-बार ये सवाल पूछा जाता है और साथ ही साथ इसका जवाब भी सामने रहता है. यूँ तो मीडिया की ज़िम्मेदारी होती है कि सही ख़बरों को सही तरीक़े से जनता के सामने पेश करे लेकिन ऐसा नहीं होता. मीडिया आजकल सेंसेशन बनाने के दौर में है.पर इस सेंसेशन में भी भेदभाव है. बहुत छोटी सी बात को बहुत बड़ा बना दिया जाता है लेकिन बहुत बड़ी बात पर एक शब्द नहीं बोला जाता. सुबह से लेकर शाम तक ऐसे मुद्दों पर टीवी में चर्चा होती है जिसका कोई सर पैर नहीं है.

कोई खुलेआम कह देता है कि इसका सर काट लाओगे तो दस करोड़ दे दूंगा और मीडिया का एक सेक्शन इस बयान को भी बचाने में लग जाता है. अक्सर कहा जाता है कि सत्ताधारी भाजपा का मेन-स्ट्रीम मीडिया पर होल्ड है. कुछ लोगों का कहना है कि भाजपा ने मीडिया को ख़रीदा हुआ है. अब इस बात में कितनी सच्चाई है ये तो कहना मुश्किल है लेकिन ये बात साफ़ नज़र आती है कि कहीं ना कहीं मीडिया का एक हिस्सा ऐसा है जो भाजपा के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से काम कर रहा है.

चाहे किसी चुनाव पर चर्चा हो या मोदी सरकार की नीतियों की, अक्सर करके पत्रकार भाजपा नेताओं से मुश्किल सवाल नहीं पूछते. हद तो ये है कि भाजपा सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए भी एंकर कांग्रेस पार्टी से सवाल करता है. मेन-स्ट्रीम मीडिया के एंकर विपक्ष के नेताओं का मज़ाक़ उड़ाते नज़र आते हैं.इससे ये साफ़ नज़र आता है कि भाजपा के पक्ष में कहीं ना कहीं से एक माहौल बनाने की कोशिश मीडिया करती है.

दिलचस्प लेकिन ये भी है कि भाजपा नेता भी मीडिया पर आरोप लगाते हैं कि मीडिया भाजपा विरोधी है. शायद उन्हें इससे भी ज़्यादा समर्थन की उम्मीद होगी.

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