अयोध्या मुद्दा: भाजपा को उसी की चाल में शिवसेना ने फँसाया?

November 25, 2018 by No Comments

लखनऊ: दो दिवसीय दौरे पर अयोध्या आए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को राम मंदिर पहुंच “राम लला” के दर्शन किए इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी और बेटा भी मौजूद रहा। वहीँ उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उन्होने साफ कहा कि वो यहां किसी एजेंडे के तहत नहीं आए हैं। उनका कहना था कि सरकार मंदिर नहीं बनाएगी तो सरकार ना बनें , लेकिन मंदिर ज़रूर बनेगा। हिंदू अब मार नहीं खाएंगे ये कहना था उद्धव ठाकरे का। उद्धव ठाकरेे ने राम मंदिर पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि मंदिर नहीं बना तो ये सरकार नहीं बनेगी। वहीँ प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले उद्धव ठाकरे ने विवादित स्थल पर “राम लला” के दर्शन किए। 

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी अपने कुनबे के साथ अयोध्या  में डेरा डाले हुए हैं. एक तरफ, वीएचपी इस जमावड़े को धर्म संसद का नाम दे रही है. तो दूसरी तरफ, उद्धव ठाकरे का कहना है कि वे राजनीति करने नहीं आए हैं, बल्कि सोये हुए कुंभकर्ण को जगाने आए हैं. कुंभकर्ण से उनका तात्पर्य केंद्र सरकार है. हालांकि अयोध्या में जमावड़े के पीछे वीएचपी की मंशा भी अलग है और शिवसेना का मकसद भी. 2014 में जब केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी तब तमाम हिंदूवादी संगठनों में राम मंदिर निर्माण को लेकर उम्मीद जगी, इसके पीछे वजहें भी थीं. एक तो खुद सीएम से पीएम बने नरेंद्र मोदी की छवि और दूसरी बीजेपी का मंदिर निर्माण को लेकर किया गया वादा. हालांकि दिन और महीने बीतते रहे, लेकिन इस मसले पर केंद्र सरकार की तरफ से कोई सुगबुगाहट नहीं हुई.

1992 में बाबरी विध्वंस के बाद शिवसेना की छवि कट्टर हिंदूवादी दल की बनी और पार्टी को इसका फायदा भी मिला, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर कम होने लगा. अयोध्या में शिवसेना प्रमुख के कार्यक्रम ने माहौल गरमा दिया है। देश भर से शिव सैनिक अयोध्या पहुंच रहे हैं। उधर विहिप व संघ ने धर्मसभा को सफल बनाने के लिए ताकत झोंक दी किंतु सफलता हाथ न लगी। लखनऊ एयरपोर्ट पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संघ प्रतिनिधियों से मंत्रणा कर धर्मसभा को सफल बनाने का संदेश दिया था। बीजेपी को इस बात का इल्म है कि अयोध्या में उद्धव ठाकरे की मौजूदगी के क्या मायने हैं और शिवसेना किस तरह इससे सियासी माइलेज हासिल कर सकती है, जिसका सीधा नुकसान बीजेपी को ही है. यही वजह है कि अब बीजेपी खुद मोर्चे पर दिख रही है और शिवसेना की कवायद से निपटने की कोशिश की जा रही है. 

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