असम से निकला गुजरात दंगे का “जिन”, और अब..

September 24, 2018 by No Comments

गुजरात के 2002 दंगें कौन भुला सकता है । उस समय इसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था । उस समय इन दंगों के संबंध मे सीधे तौर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम सामने आया था। तब दंगों को लेकर राजनीति भी खूब हुई थी। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मोदी को मौत का सौदागर कहा था ।वहीं उन्ही के दल बीजेपी के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी ने भी कहा था कि मोदी ने राज धर्म का पालन नहीं किया ।

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री


दो दशक होने को आए लेकिन गुजरात दंगों का जिन कभी भी बाहर निकल आता है और इस बार यह जिन निकला है असम से । यहाँ असम पुलिस ने दो लोगों की शिकायत के आधार पर राजनीति विज्ञान की किताब के तीन लेखकों ने खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस किताब मे गुजरात दंगों
में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका का जिक्र किया गया है ।

यह किताब 12वीं के छात्रों को पढ़ाई जाती है । यह असमिया भाषा में लिखी गई है एंव 2011 से स्कूलों मे पढ़ाई जा रही है ।इस पुस्तक के पेज नंबर 376 पर लिखा है कि साल 2002 में जब गुजरात में दंगे हो रहे थे, साबरमती एक्सप्रेस की बोगी को गोधरा स्टेशन पर आग लगा दी गई थी जिसमें 57 लोगों की मौत हुई थी उसके बाद भड़के दंगे के वक्त तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी खामोश थे ।

इस किताब को तीन लेखक ने मिलकर लिखा है । जिनके नाम दुर्गा कांता शर्मा (पूर्व एचओडी आर्य विद्यापीठ कॉलेज), रफीक जमान (पूर्व एचओडी गोलपारा कॉलेज) और मानस प्रोतिम बरुआ (पूर्व एचओडी साउथ कामरुप कॉलेज) हैं । इन में से दुर्गा कांता शर्मा की कुछ साल पहले मौत हो चुकी है।

एफआईआर में शिकायतकर्ताओं की तरफ से कहा गया है कि इसके लेखक और पब्लिशर असम बुक डिपो ने गोधरा दंगों पर झूठी जानकारी दी है ।उनका कहना है सच यह है कि मोदी सरकार ने इस मामले की जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम गठित की थी जिसने सीएम मोदी की भूमिका होने से इंकार किया था ।

लेखकों ने गुजरात में तत्कालीन मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि वे “मूक दर्शक” और मुसलमानों के खिलाफ हिंदुओं की “मदद” करने में लिप्त थे । शिकायत कर्ताऔ के अनुसार यह जानकारी छात्रों को गुमराह करने वाली है ।वहीं इस मामले पर लेखकों का कहना है कि उन्होंने किताब में कुछ भी विवादित नहीं लिखा गया है.

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