J&K राज्यपाल के फ़ैसले से भाजपा विधायक नाराज़, दिया ये बयान

जम्मू-कश्मीर : राज्यपाल एक संवैधानिक पद होता है। राजयपाल से उम्मीद की जाती है कि वह दलगत राजनीति से उपर उठकर निष्पक्ष भाव से अपने कर्तव्य का पालन करेंगे। लेकिन चूंकि राज्यपाल सरकार द्वारा नियुक्त किये जाते हैं इसलिए अकसर वह पार्टी मोह को छोड़ नहीं पाते हैं।

जम्मू कशमीर के राज्यपाल ने कुछ समय पहले विधानसभा भंग कर दी थी। जिसके लिए उन्हें काफ़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।लेकिन अब उनके फ़ैसले को जम्मू कशमीर विधानसभा के एक बीजेपी विधायक ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यह विधायक हैं गगनदीप भगत। वह जम्मू के रनबीर सिहं पुरा (आरएस पुरा) से विधायक हैं। उन्होंने राज्यपाल के फैसले को असंवैधानिक बताते हुए उम्मीद जताई कि न्यायालय सदन को फिर से बहाल करेगा। उनका कहना है बीजेपी के सभी विधायक चाहते हैं कि सदन पहले की तरह बहाल हो जाए। हालांकि यह विधायक खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं।

भगत ने राज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपने पद की गरिमा का ख़्याल नहीं रखा। उन्होंने आगे कहा कि राज्यपाल भले ही हमारी पार्टी के हों, लेकिन उन्हें संवैधानिक तरीके से कार्य करना चाहिए था।उन्होंने आगे कहा कि पीडीपी और एनसीपी सरकार बनाने के लिए आगे आई थी, लेकिन राज्यपाल ने 15 मिनट के अंदर विधानसभा को ही भंग कर दिया। उनका मानना है कि राज्यपाल को,दोनों पार्टियों को अगले दिन फ्लोर टेस्ट के लिए बुलवाना चाहिए था। यदि इस टेस्ट में बहुमत साबित नहीं होता तब ही विधानसभा को भंग करना चाहिए था।

अपने ही दल बीजेपी के खिलाफ जाकर उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने पर उनका कहना है कि यह उनका मोलिक अधिकार है।उन्होंने पार्टी को अपने निर्णय के बारे मे बता दिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी ने इस पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी है । बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दते हुए कहा कि भगत के द्वारा दायर की गई याचिका उनका अपना निजी फैसला है। पार्टी के तौर पर बीजेपी ने राज्यपाल के फैसले का स्वागत किया है।

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