इस बार विपक्ष के गेम में फँस गयी भाजपा!

November 22, 2018 by No Comments

सियासत एक ऐसी चीज़ है जिसमें जो दिखता है उससे अधिक वो इम्पोर्टेन्ट होता है जो नहीं दिखता. गोवा और कई राज्यों में जोड़-तोड़ कर सरकार बनाने वाली भाजपा को पिछले एक-दो दिन में जम्मू-कश्मीर में ऐसा झटका लगा जो पार्टी की सारी रणनीति को धराशायी कर गया. 19 जून को पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया था, उसके बाद से ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है. पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस बार बार कह रहे थे कि विधानसभा को भंग किया जाना चाहिए पर ऐसा नहीं हुआ.

अचानक ही कल सुबह गतिविधियाँ तेज़ हुईं और लगा कि कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के समर्थन से पीडीपी फिर सरकार बना लेगी. भाजपा इस पूरे गेम को समझ पाती तब तक महबूबा मुफ़्ती ने राज-भवन को एक ख़त भेजकर सरकार बनाने का दावा पेश किया. हालाँकि राज-भवन ने कहा कि फैक्स मशीन ख़राब होने की वजह से महबूबा का ख़त राजभवन नहीं पहुंचा. इसको लेकर भी उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती ने राज्यपाल पर कटाक्ष किए. उसकी वजह ये रही कि इस ख़त के भेजे जाने के बाद ही राज्यपाल ने अचानक ही विधानसभा भंग कर दी.

राज्यपाल का अचानक विधानसभा भंग कर देने से विपक्षी दलों को एक मुद्दा मिल गया है. वहीं पीडीपी के एक नेता ने कहा कि वो पहले ही जानते थे कि जब भाजपा को लगेगा कि हमारी सरकार बन रही है तो राज्यपाल विधानसभा भंग कर देंगे. उन्होंने कहा कि हम यही चाहते थे और हमें इलेक्शन में जाने में कोई परेशानी नहीं है. नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस भी विधानसभा भंग होने से ख़ुश हैं. चुनाव होने की स्थिति में किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी उसी आधार पर सरकार बनेगी. फिल्हाल पीडीपी,कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के साथ आ जाने से ये गठबंधन बहुत मज़बूत स्थिति में है. कहा ये भी जा रहा है कि भाजपा भी सरकार बनाने की कोशिश में थी और सज्जाद लोन को आगे कर वो सरकार बनाना चाहती थी लेकिन अंकगणित के खेल में भाजपा पीछे रह जा रही थी. इस पूरे मामले से भाजपा को दो बड़े झटके लगे हैं, एक तो जम्मू-कश्मीर में भी महागठबंधन बन गया है और जो ये तीनों दल चाहते थे वो हो गया है.

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