गुजरात चुनाव में क्या बीजेपी की मुश्किलों को बढ़ा सकते हैं ये तीन युवा नेता

गुजरात: प्रधानमंत्री मोदी के गृहराज्य गुजरात में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। हालांकि चुनाव दिसंबर में होने वाले हैं, लेकिन इलेक्शन कमीशन ने अभी तक चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है।

चुनाव की तैयारी में जुटे राजनीतिक दल जमकर रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं। गौर करने की बात है कि बीते सालों में गुजरात बीजेपी का गढ़ रहा है। लेकिन इस बार इस चुनावी दंगल में तीन युवाओं ने पार्टी की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। बीते दो सालों में जिस तरह तीन युवाओं हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकुर ने पाटीदार, ओबीसी और दलित समुदायों को प्रभावित किया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार य तीनों युवा गुजरात विधानसभा चुनाव को प्रभावित करेंगे। गुजरात की आबादी में ओबीसी का हिस्सा 51 फीसदी है। ऐसे में बड़े पैमाने पर बीजेपी को मुकाबला दिया जा सकता है। इन तीन नेताओं का प्रभाव राज्य की 100 से अधिक सीटों पर हो सकता है. हालंकि बीजेपी पाटीदार समुदाय के वोट हासिल करने की कोशिशों में है। पार्टी ने पाटीदार नेताओं के खिलाफ केस भी वापिस ले लिए हैं लेकिन पाटीदार नेताओं के रुख़ से ऐसा लता है वो भाजपा के विरोध में ही मतदान करेंगे.

वहीँ राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के संयोजक जिग्नेश मेवाणी का रुख़ और भी तल्ख़ है. वो भाजपा को सीधे तौर पर आरएसएस का अंग बताते हैं. मेवानी के मुताबिक़ भाजपा संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ हिन्दू राष्ट्र की स्थापना की बात करती है. उनका कहना है कि कोई और पार्टी इस तरह की बात नहीं करती. मेवानी के मुताबिक़ 2 दर्जन से अधिक ऐसी सीटें हैं राज्य में जिसे दलित और मुस्लिम समुदाय प्रभावित करने वाले हैं.

साथ ही जिग्नेश ये भी कहते आये हैं कि अगर मुस्लिम, दलित और पाटीदारों के हित के लिए अगर उन्हें हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकुर को एक साथ आना पड़ा तो तो वो पीछे नहीं हटेंगे। हालाँकि अल्पेश ठाकुर राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई कमेंट करने से बचते हैं.

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