ब्राज़ील के इस फ़ैसले से मुस्लिम समाज को लगा झटका

November 4, 2018 by No Comments

ब्राज़ील: दक्षिणी अमरीका के देश ब्राज़ील में दक्षिणपंथी सरकार बनी है. ब्राज़ील में जाइर बोलसोनारो राष्ट्रपति नियुक्त हुए हैं. राष्ट्रपति बनने के बाद ही जाइर ने एक ऐसा निर्णय लिया है जो वैश्विक सियासत को गर्मा रहा है. उन्होंने इज़राइल में ब्राज़ील के दूतावास को जेरुसलम ले जाने की बात कही है. ग़ौरतलब है कि इजराइल की राजधानी तेल-अवीव है लेकिन जेरुसलम पर क़ब्ज़ा करने के इरादे से इजराइल अपनी राजधानी जेरुसलम मानता है. उसको इस कोशिश में तब बड़ा लाभ हुआ जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल स्थित अपनी एम्बेसी को जेरुसलम ले जाने की बात कही.

अमरीका की देखा-देखी ग्वाटेमाला ने भी अपनी एम्बेसी को जेरुसलम ले जाने की बात कही. इसमें ध्यान देने वाली बात ये है कि जेरुसलम फ़िलिस्तीन-इजराइल विवाद को लेकर बड़ा मुद्दा है. दोनों पक्ष इसे अपना कहते हैं. इजराइल ने 1967 में हुए यु-द्ध के बाद से ही अपनी गतिविधि इधर बढ़ा दी और फ़िलिस्तीनी ज़मीनों पर सेटलमेंट बनाना शुरू कर दिया. हालाँकि इजराइल जिस ज़मीन पर है वो कभी फ़िलिस्तीनी मैंडेट का ही हिस्सा थी. ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने इस बारे में ट्वीट किया है,”जैसा कि हम अपने चुनाव प्रचार के दौरान कह चुके हैं। हम ब्राजीली दूतावास को तेल अवीव से जेरुसलम ले जाना चाहते हैं। इजराइल एक संप्रभु राष्ट्र है और हम पूरी तरह उसका सम्मान करेंगे।”

इजराइली प्रधानमंत्री बेन्यमिन नेतान्याहू ने बोलसोनारो के बयान का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि मैं अपने दोस्त ब्राजील के नव निर्वाचित राष्ट्रपति जाइर बोलसोनारो को ब्राजीली दूतावास येरुशलम ले जाने की इच्छा के लिए बधाई देता हूँ जो एक ऐतिहासिक, सही और उत्साहवर्धक कदम है। ब्राज़ील अगर ऐसा करता है तो वो ऐसा तीसरा मुल्क बन जाएगा जिसने इजराइल में अपने दूतावास को तेल-अवीव से हटा कर जेरुसलम में किया है.कुछ जानकार मानते हैं कि ब्राज़ील का ऐसा करना संयुक्त राष्ट्र के फ़ैसलों का भी उल्लंघन होगा वहीं ब्राज़ील के इस फ़ैसले पर अरब और मुस्लिम समाज कैसी प्रतिक्रिया देता है ये देखने वाली बात होगी.

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