ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने इज़राइल को लगायी फटकार, जानिये क्या है मामला

बल्फौर डिक्लेरेशन के सौ साल होने के उपलक्ष्य में जहां इजराइल में जश्न का माहौल है वहीँ फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. इस बीच ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू से साफ़ कह दिया है कि इजराइल को किसी भी सूरत में इललीगल सेत्त्लेमेंट्स ख़त्म करने होंगे, तभी शान्ति संभव है.

मे ने कहा कि दोनों तरफ़ के लोगों को कुछ समझौते करने होंगे तभी शान्ति संभव है. वहीँ पांच दिन के दौरे पर लन्दन आये बेंजामिन नेतान्याहू ने कहा कि उनका देश शांति के प्रति समर्पित है.

बल्फौर डिक्लेरेशन को फ़िलिस्तीनी ज़मीन पर इजराइल के बनाए जाने के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है. 1917 में हुए इस डिक्लेरेशन में ही यहूदी स्टेट की स्थापना की गयी थी लेकिन फ़िलिस्तीनी स्टेट को भी इसमें बराबरी का हक़ दिया गया था. समझने की बात है कि जब ये डिक्लेरेशन हुआ था उस वक़्त प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था और ये हिस्सा ओटोमन साम्राज्य के अंतर्गत आता था. इसके बाद जब युद्ध ख़त्म हुआ तो ये ब्रिटेन के पास पलेस्टाइनियन मैंडेट में चला गया. इस मैंडेट से ही इजराइल और फ़िलिस्तीन देश बनने थे लेकिन इजराइल ने फ़िलिस्तीन वाला हिस्सा भी क़ब्ज़ा लिया है. ऐसा माना जाता है कि इजराइल को संयुक्त राज्य अमरीका का समर्थन रहा है और यही वजह है कि इजराइल अपनी नीति चलवाने में कामयाब हो जाता है और कोई भी अमरीकी राष्ट्रपति इजराइल के ख़िलाफ़ नहीं जा पाता.

विश्व राजनीति में फ़िलिस्तीन-इजराइल का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा माना जाता है. जानकारों के मुताबिक़ अभी तक इसका कोई भी ठीक हल निकल पाने का यही कारण है कि इजराइल 1967 युद्ध में क़ब्ज़ाये फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में अपनी कालोनी बना रहा है और वहाँ इजराइली नागरिकों को बसा रहा है. वैश्विक कम्युनिटी बार बार इजराइल को इस बात के लिए चेतावनी दे चुकी है लेकिन इजराइल ऐसा करता रहता है.

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